बलिया में टीबी मरीजों के लिए पोषण पोटली वितरण कार्यक्रम आयोजित
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आशीष दुबे, बलिया
बलिया में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम और प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को विकास भवन सभागार में टीबी मरीजों के लिए पोषण पोटली वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने 50 टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की और उन्हें नियमित दवा के साथ पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी।
जिलाधिकारी ने कहा कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके लिए मरीजों को निर्धारित अवधि तक बिना किसी रुकावट के दवाएं लेनी चाहिए। साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए संतुलित और प्रोटीन युक्त भोजन भी आवश्यक है।
पोषण पोटली में शामिल की गई प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री
स्वास्थ्य विभाग की ओर से वितरित की गई पोषण पोटली में मरीजों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने वाली कई आवश्यक सामग्री शामिल की गई। इनमें राजमा, भुना चना, गुड़, चने का सत्तू और प्रोटीनेक्स पाउडर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने मरीजों को प्रोटीनेक्स पाउडर के उपयोग का तरीका भी बताया। उन्होंने कहा कि नियमित दवा के साथ पौष्टिक भोजन लेने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे टीबी के मरीज जल्दी स्वस्थ होने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
एक सप्ताह में 1700 टीबी मरीजों तक पहुंचेगी पोषण पोटली
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि जिले में कुल 1700 टीबी मरीजों को पोषण पोटली उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि यह लक्ष्य एक सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल दवा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि मरीजों के पोषण स्तर में सुधार करना भी है। इसी उद्देश्य से प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है ताकि इलाज के दौरान मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सके।
टीबी उन्मूलन अभियान में बलिया को मिला प्रदेश में पांचवां स्थान
100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान के दौरान बलिया जनपद ने प्रदेश स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान प्राप्त किया है। जिलाधिकारी ने इसे स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और सभी संबंधित कर्मचारियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जांच और मरीजों की पहचान का कार्य किया गया, जिससे समय पर उपचार शुरू कराया जा सका।
592 हाई-रिस्क गांवों की स्क्रीनिंग पूरी
टीबी उन्मूलन अभियान के तहत जिले के 592 हाई-रिस्क गांवों में विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों की सहायता से लोगों की जांच की गई।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभियान का निर्धारित लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। स्क्रीनिंग के माध्यम से संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें आगे की जांच और उपचार से जोड़ा गया।
हनुमानगंज और शहरी क्षेत्र में मिले सबसे अधिक मरीज
अभियान के दौरान विकासखंड हनुमानगंज और शहरी क्षेत्र में सबसे अधिक टीबी मरीज चिन्हित किए गए। स्वास्थ्य विभाग ने इन क्षेत्रों में निगरानी और उपचार व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम शुरू किया है।
अधिकारियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में अधिक मरीज मिले हैं, वहां नियमित स्वास्थ्य जांच, जागरूकता अभियान और फॉलो-अप की प्रक्रिया जारी रहेगी।
‘टीबी से डरें नहीं, समय पर इलाज कराएं’
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने टीबी मरीजों और उनके परिजनों से कहा कि टीबी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। यदि समय पर जांच कराकर नियमित दवा ली जाए और डॉक्टर की सलाह का पालन किया जाए तो मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति में लगातार खांसी, वजन कम होना, बुखार या अन्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं। बीमारी छिपाने के बजाय समय पर उपचार शुरू करना सबसे महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य विभाग गांव-गांव कर रहा मरीजों की पहचान
जिलाधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार गांवों में जाकर संभावित मरीजों की पहचान कर रही हैं। स्क्रीनिंग, जांच और उपचार की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी मरीज का इलाज बीच में न रुके।
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी आलोक कुमार, जिला विकास अधिकारी आनंद प्रकाश तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
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