बलिया में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा धूमधाम से निकली, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल
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आशीष दुबे, बलिया
बलिया: शहर में गुरुवार शाम भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक रथयात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के अवसर पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। रथयात्रा शहर के ठाकुर बाड़ी मंदिर से शुरू होकर निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची, जहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को विधि-विधान के साथ गर्भगृह में स्थापित किया गया।
यह रथयात्रा बलिया की सबसे पुरानी धार्मिक परंपराओं में गिनी जाती है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह आयोजन पिछले 124 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शाम चार बजे पूजा के बाद शुरू हुई रथयात्रा
मंदिर के सर्वकार अंकित बरनवाल ने बताया कि गुरुवार शाम करीब चार बजे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को गर्भगृह से बाहर लाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बाद तीनों विग्रहों को विशेष रूप से सजाए गए रथ पर स्थापित किया गया।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने जयघोष के बीच रथ को खींचना शुरू किया। यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ी। पूरे रास्ते श्रद्धालु भगवान के दर्शन करते रहे और धार्मिक भजन-कीर्तन का आयोजन भी होता रहा।
124 वर्षों से निभाई जा रही है परंपरा
मंदिर प्रबंधन के अनुसार ठाकुर बाड़ी मंदिर का निर्माण वर्ष 1901 में कराया गया था। तभी से यहां भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की परंपरा लगातार चली आ रही है। इस वर्ष भी उसी परंपरा का निर्वहन किया गया।
मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को यह रथयात्रा निकाली जाती है, जिसमें शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
सागौन और शीशम की लकड़ी से बना है 3 टन वजनी रथ
रथयात्रा का मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ का विशाल लकड़ी का रथ रहा। मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह रथ सागौन और शीशम की लकड़ी से तैयार किया गया है और इसका वजन लगभग तीन टन है।
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को रथ पर स्थापित करने के बाद श्रद्धालुओं ने रस्सियों की सहायता से पूरे मार्ग में रथ को खींचा। धार्मिक मान्यता के अनुसार रथ खींचना पुण्य का कार्य माना जाता है, इसलिए बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें भागीदारी की।
इन प्रमुख मार्गों से होकर निकली यात्रा
रथयात्रा ठाकुर बाड़ी मंदिर से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। यात्रा का मार्ग माल गोदाम रोड, रेलवे स्टेशन क्षेत्र, चौक, गुदड़ी बाजार, विजय सिनेमा रोड और हनुमानगढ़ी होते हुए पुनः मंदिर तक निर्धारित किया गया था।
मार्ग के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी कीं।
मंदिर पहुंचने के बाद हुई प्रतिमाओं की पुनः स्थापना
निर्धारित मार्ग पूरा करने के बाद रथयात्रा मंदिर पहुंची। यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को रथ से उतारकर वैदिक मंत्रों और धार्मिक विधि-विधान के साथ गर्भगृह में स्थापित किया गया।
इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। आयोजन के समापन तक बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में मौजूद रहे।
प्रशासन और आयोजन समिति रही सक्रिय
रथयात्रा के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति पूरी तरह सक्रिय रही। प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए। आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
इस अवसर पर हिमांशु बरनवाल, प्रशान्त बरनवाल, सुयश बरनवाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाठक, सागर सिंह राहुल सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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