लखनऊ में कोचिंग सेंटर की बिल्डिंग में भीषण आग, 15 छात्रों की मौत
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आशीष दुबे
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने 15 बच्चों की जान ले ली। हादसे में कई छात्र गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग लगाने वाले कई बच्चे भी गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग की शुरुआत AC के कंप्रेसर फटने के बाद हुई और कुछ ही मिनटों में पूरी बिल्डिंग इसकी चपेट में आ गई।
वेयरहाउस से शुरू हुई आग ने पूरी बिल्डिंग को घेरा
जानकारी के मुताबिक, ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप संचालित होती थी, जबकि पहली मंजिल को उसी दुकान का वेयरहाउस बनाया गया था। दूसरी मंजिल पर थ्री-डी एनीमेशन का संस्थान और 12वीं तक के छात्रों के लिए कोचिंग क्लास चल रही थी।
दोपहर करीब 2:30 बजे वेयरहाउस में अचानक आग लग गई। शुरुआती जांच में AC के कंप्रेसर में विस्फोट को आग लगने की वजह माना जा रहा है। वेयरहाउस में रखे सामान के कारण आग तेजी से फैलती चली गई और देखते ही देखते दूसरी और तीसरी मंजिल तक पहुंच गई, जहां बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे।
धुएं और आग के बीच फंस गए छात्र
आग लगने के बाद बिल्डिंग के अंदर धुआं तेजी से भर गया। ऊपरी मंजिलों पर मौजूद कई छात्रों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। कुछ छात्र खिड़कियों तक पहुंचे, लेकिन सुरक्षित रास्ता न मिलने के कारण अंदर ही फंस गए।
पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। करीब दो घंटे तक चले अभियान में 15 बच्चों के शव बाहर निकाले गए। कई घायल छात्रों को ट्रॉमा सेंटर और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है।
जान बचाने के लिए लगाई छलांग, ग्रिल में फंसकर घायल हुए छात्र
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब आग तेजी से फैलने लगी तो चार से पांच छात्रों ने ऊपर से छलांग लगा दी। इनमें एक छात्र नीचे लगी लोहे की ग्रिल पर गिर गया, जिससे ग्रिल की सरिया उसके पेट में धंस गई। अन्य छात्रों को भी गंभीर चोटें आईं और उन्हें तत्काल अस्पताल भेजा गया।
दमकल की देरी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि आग लगने के करीब 40 मिनट बाद दमकल की पहली टीम मौके पर पहुंची। तब तक आग पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले चुकी थी। लोगों ने आरोप लगाया कि यदि राहत दल समय पर पहुंच जाता तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
इस घटना के बाद राजधानी में अग्निशमन व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
बिल्डिंग में नहीं था दूसरा निकास मार्ग
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बिल्डिंग में बाहर निकलने का दूसरा रास्ता नहीं था। इमारत के तीनों ओर अन्य भवन बने हुए थे, जिससे आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी संभव नहीं हो सकी।
कुछ लोग किसी तरह खिड़की का शीशा तोड़कर बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन अधिकांश छात्र धुएं और आग के कारण अंदर ही फंस गए। इस वजह से इमारत की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण नियमों के पालन को लेकर भी जांच शुरू कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने दौरा छोड़ा, अधिकारियों को दिए निर्देश
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में चल रही अपनी जनसभा बीच में छोड़कर लखनऊ लौट आए। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने तथा घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, डीजी फायर और पुलिस कमिश्नर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
प्रधानमंत्री ने आर्थिक सहायता का किया एलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इसे अत्यंत दुखद घटना बताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
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