माटीकला योजना से बदली जिंदगी: बलिया की पद्मावती देवी ने खड़ा किया सफल उद्यम, 40 महिलाओं को मिला रोजगार
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आशीष दुबे, बलिया
बलिया। उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना ने बलिया जिले की एक महिला उद्यमी की जिंदगी बदलने का उदाहरण पेश किया है। जिले के विशुनपुर (मानिकपुर) गांव की रहने वाली पद्मावती देवी ने इस योजना का लाभ लेकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आज अपने उद्योग के माध्यम से लगभग 40 महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध करा रही हैं। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ उनका काम अब कई जिलों तक पहुंच चुका है और उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
सीमित संसाधनों से शुरू हुआ सफर
पद्मावती देवी पहले अपने पति राजकुमार प्रजापति के साथ पारंपरिक तरीके से मिट्टी के बर्तन तैयार करती थीं। घर पर छोटे स्तर पर दीये, कुल्हड़ और अन्य मिट्टी के सामान बनाए जाते थे, लेकिन आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के कारण कारोबार का विस्तार नहीं हो पा रहा था। उत्पादन कम होने से आय भी सीमित थी, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करना चुनौती बना हुआ था।
वर्ष 2020-21 में मिला योजना का लाभ
वर्ष 2020-21 में पद्मावती देवी ने जिला ग्रामोद्योग कार्यालय से संपर्क किया। जांच और प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत 50 हजार रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया। इस आर्थिक सहायता से उन्होंने अपने काम को नई दिशा दी और आधुनिक उपकरणों के साथ उत्पादन बढ़ाने की शुरुआत की।
प्रशासन की ओर से योजना का लाभ मिलने के बाद उन्होंने अपने व्यवसाय में निवेश किया और धीरे-धीरे उत्पादन क्षमता बढ़ाई। इससे उनके उद्यम का विस्तार संभव हो सका।
आधुनिक मशीनों से बढ़ा उत्पादन
योजना से मिली सहायता के बाद पद्मावती देवी ने दीये, कुल्हड़, गमले और अन्य सजावटी मिट्टी के उत्पादों का निर्माण बड़े पैमाने पर शुरू किया। वर्तमान में उनके उद्योग में करीब 15 मशीनें संचालित हो रही हैं, जिनकी मदद से पहले की तुलना में कहीं अधिक उत्पादन किया जा रहा है।
मशीनों के उपयोग से उत्पादों की गुणवत्ता और संख्या दोनों में वृद्धि हुई है। इससे बाजार की मांग पूरी करना भी आसान हो गया है।
कई जिलों तक पहुंच रहे उत्पाद
पद्मावती देवी के तैयार किए गए मिट्टी के उत्पाद अब केवल बलिया तक सीमित नहीं हैं। उनकी आपूर्ति देवरिया, मऊ सहित आसपास के कई जिलों में की जा रही है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से भी उनके उत्पाद ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं।
उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण उन्हें लगातार नए ऑर्डर भी प्राप्त हो रहे हैं, जिससे उनके कारोबार का दायरा और बढ़ रहा है।
40 महिलाओं को मिला रोजगार
कारोबार के विस्तार के साथ पद्मावती देवी ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ाए हैं। वर्तमान में उनके उद्यम से लगभग 40 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो मिट्टी के उत्पादों के निर्माण, सजावट, पैकिंग और अन्य कार्यों में सहयोग कर रही हैं।
इससे ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव में ही रोजगार मिल रहा है और उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है। स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
स्वदेशी मेले में मिली पहचान
हाल ही में आयोजित स्वदेशी मेला 2025-26 में पद्मावती देवी ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। मेले में उनके स्टॉल को जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सराहा। इस दौरान विभिन्न संस्थानों और ग्राहकों ने उनके उत्पादों में रुचि दिखाई, जिसके बाद उन्हें नए ऑर्डर भी मिले।
मेले में मिली इस पहचान से उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली और नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर भी मिला।
योजना को बताया सफलता का आधार
पद्मावती देवी ने अपनी सफलता का श्रेय उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड और मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना को दिया। उनका कहना है कि सरकारी सहायता मिलने से उन्हें कारोबार बढ़ाने का अवसर मिला। आज उनका परिवार आर्थिक रूप से पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर है और उनके उद्योग से कई अन्य लोगों को भी रोजगार मिल रहा है।
जिला ग्रामोद्योग विभाग के अनुसार, माटीकला से जुड़े पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ाना और पारंपरिक हस्तशिल्प को मजबूत करना है।
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