बारिश में बच्चों में मलेरिया का खतरा बढ़ा, जानें शुरुआती लक्षण और बचाव
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आशीष दुबे
बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इसके साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। जगह-जगह जलभराव होने से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिसके कारण मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां फैलने लगती हैं। इनमें मलेरिया ऐसी बीमारी है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन छोटे बच्चों में इसका खतरा सबसे अधिक माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि माता-पिता मलेरिया के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, तो बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है। सही समय पर इलाज मिलने से अधिकांश बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।
बच्चों में मलेरिया का खतरा क्यों ज्यादा होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार पांच साल से कम उम्र के बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती। यही वजह है कि मलेरिया का परजीवी उनके शरीर पर तेजी से असर डाल सकता है। कई बार छोटे बच्चे अपनी परेशानी ठीक से बता भी नहीं पाते, जिससे बीमारी की पहचान में देरी हो जाती है।
कुपोषण से जूझ रहे बच्चों या कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। वहीं, जिन इलाकों में लंबे समय तक पानी जमा रहता है या साफ-सफाई की कमी होती है, वहां रहने वाले बच्चों में मलेरिया होने की संभावना अधिक रहती है।
मलेरिया कैसे फैलता है?
मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज (Anopheles) मच्छर के काटने से फैलता है। जब यह मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद दूसरे व्यक्ति को काटता है, तो मलेरिया परजीवी शरीर में प्रवेश कर जाता है।
बारिश के मौसम में गड्ढों, कूलर, टायर, गमलों और खुले बर्तनों में जमा पानी मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। इसलिए इस मौसम में विशेष सतर्कता बरतना जरूरी होता है।
बच्चों में मलेरिया के शुरुआती संकेत
मलेरिया की शुरुआत अक्सर सामान्य वायरल बुखार जैसी लग सकती है। यही कारण है कि कई लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं।
बच्चों में दिखाई देने वाले प्रमुख संकेत इस प्रकार हैं—
तेज बुखार आना।
ठंड लगना और कंपकंपी होना।
अत्यधिक पसीना आना।
सिरदर्द और शरीर में कमजोरी महसूस होना।
भूख कम लगना।
छोटे बच्चों में लगातार रोना या चिड़चिड़ापन।
दूध या खाना खाने से मना करना।
सुस्ती और बार-बार सोते रहना।
यदि बच्चा ऐसे क्षेत्र में रहता है जहां मलेरिया के मामले अधिक आते हैं और इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
इलाज में देरी होने पर क्या हो सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मलेरिया का समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। कुछ मामलों में यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है।
गंभीर स्थिति में बच्चे को—
दौरे पड़ सकते हैं।
बेहोशी आ सकती है।
सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
किडनी और लिवर प्रभावित हो सकते हैं।
गंभीर संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है।
हालांकि, समय पर जांच और सही दवा शुरू होने पर अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा का पूरा कोर्स पूरा करना भी जरूरी है।
बारिश के मौसम में बच्चों को मलेरिया से कैसे बचाएं?
मलेरिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना और उनके काटने से बचना है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए इन बातों का ध्यान रखें—
रात में बच्चों को मच्छरदानी के अंदर सुलाएं।
पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं ताकि शरीर का अधिक हिस्सा ढका रहे।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार सुरक्षित मच्छररोधी क्रीम या रिपेलेंट का उपयोग करें। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, टायर और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें। खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाएं। आसपास साफ-सफाई बनाए रखें और जलभराव होने पर तुरंत उसे हटाएं।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि बच्चे को तेज बुखार लगातार बना रहे, बार-बार कंपकंपी आए, बच्चा खाना-पीना छोड़ दे या बहुत ज्यादा सुस्त दिखाई दे, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मलेरिया की पुष्टि के लिए रक्त जांच की जाती है, जिसके आधार पर उपचार शुरू किया जाता है।
स्वयं दवा लेने या घरेलू उपचार के भरोसे रहने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
निष्कर्ष
बारिश का मौसम मच्छर जनित बीमारियों के फैलने का सबसे संवेदनशील समय होता है। ऐसे में छोटे बच्चों को मलेरिया से बचाने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है।
घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना, पानी जमा न होने देना, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना और शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना इस बीमारी से बचाव के सबसे प्रभावी तरीके हैं।
समय पर पहचान और इलाज से मलेरिया को गंभीर होने से रोका जा सकता है और बच्चों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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