के. अन्नामलाई की कहानी: ईमानदार IPS से नई राजनीतिक राह तक का पूरा सफर
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आशीष दुबे
के. अन्नामलाई का नाम आज देश की राजनीति में तेजी से उभरते चेहरों में लिया जाता है। एक किसान परिवार से निकलकर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) तक पहुंचने और फिर स्वेच्छा से नौकरी छोड़कर राजनीति का रास्ता चुनने तक का उनका सफर लगातार चर्चा में रहा है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने और अपने नए जन आंदोलन की शुरुआत के बाद वह एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
किसान परिवार से शुरू हुई यात्रा
के. अन्नामलाई का पूरा नाम कुप्पुसामी अन्नामलाई है। उनका जन्म तमिलनाडु के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) लखनऊ से एमबीए की डिग्री हासिल की।
उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और वर्ष 2011 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने कर्नाटक कैडर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
एक फैसले ने दिलाई अलग पहचान
30 जनवरी 2019 को दक्षिण बेंगलुरु के कुमारस्वामी लेआउट पुलिस स्टेशन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी एक महिला के साथ अनुचित व्यवहार करते दिखाई दिए। मामले की जांच अन्नामलाई के अधिकार क्षेत्र में हुई।
जांच के दौरान केवल संबंधित घटना ही नहीं, बल्कि पूरे थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। इसके बाद अन्नामलाई ने बिना किसी दबाव के 78 में से 71 पुलिसकर्मियों का तबादला कर दिया। उनके इस फैसले की काफी चर्चा हुई और उनकी सख्त कार्यशैली के कारण लोगों ने उन्हें ‘सिंघम’ की उपाधि देना शुरू कर दिया।
क्यों छोड़ी IPS की नौकरी?
अन्नामलाई का पुलिस सेवा छोड़ने का फैसला कई लोगों के लिए अप्रत्याशित था। वर्ष 2018 में कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी के निधन की घटना ने उन्हें जीवन के उद्देश्य पर गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने तय किया कि वे समाज के लिए अलग तरीके से काम करना चाहते हैं।
वर्ष 2019 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर पुलिस सेवा छोड़ दी। शुरुआत में उनकी योजना राजनीति में आने की नहीं थी। उनका उद्देश्य अपने गांव लौटकर जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना था।
समाज सेवा से राजनीति तक का सफर
पुलिस सेवा छोड़ने के बाद अन्नामलाई ने वर्ष 2020 में ‘वी द लीडर्स फाउंडेशन’ की स्थापना की। इस संस्था का उद्देश्य ग्रामीण विकास, प्राकृतिक खेती, युवाओं को नेतृत्व के लिए तैयार करना और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना था।
बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति में आने का निर्णय लिया। शुरुआती दौर में उनकी इच्छा अभिनेता रजनीकांत के साथ राजनीतिक सफर शुरू करने की थी, लेकिन परिस्थितियां बदलने के बाद वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
वर्ष 2021 से 2025 तक उन्होंने तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने राज्य में पार्टी के संगठन को मजबूत करने और युवाओं तक पहुंच बनाने पर विशेष ध्यान दिया।
भाजपा से इस्तीफा और नई राजनीतिक शुरुआत
हाल के दिनों में चुनावी रणनीति को लेकर मतभेद सामने आने के बाद अन्नामलाई ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने ‘अन्नामलाई मक्कल इयक्कम’ नाम से एक नया जन आंदोलन शुरू किया।
बताया जा रहा है कि इस अभियान से लाखों लोग जुड़ चुके हैं। अपने नए मंच के जरिए अन्नामलाई ग्रामीण विकास, पारदर्शी राजनीति, युवाओं की भागीदारी और वंशवाद के विरोध जैसे मुद्दों को प्रमुखता दे रहे हैं।
किताब में साझा किए अपने अनुभव
अन्नामलाई ने अपने पुलिस जीवन और व्यक्तिगत अनुभवों को ‘स्टेपिंग बियॉन्ड खाकी: रिवेलेशंस ऑफ ए रियल-लाइफ सिंघम’ नामक पुस्तक में विस्तार से लिखा है।
इस पुस्तक में उन्होंने केवल पुलिस सेवा की घटनाओं का उल्लेख नहीं किया, बल्कि अपने फैसलों, चुनौतियों, गलतियों और उनसे मिली सीख को भी खुलकर साझा किया है। यही कारण है कि यह पुस्तक युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय रही।
खेती, शिक्षा और समाज सेवा से गहरा जुड़ाव
अन्नामलाई का मानना है कि गांवों का विकास देश की प्रगति का आधार है। यही वजह है कि वे जैविक खेती, ग्रामीण उद्यमिता और युवाओं के कौशल विकास को लगातार बढ़ावा देते रहे हैं।
राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान उन्होंने वर्ष 2024 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की चेविनिंग गुरुकुल फेलोशिप में भी भाग लिया। इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने सार्वजनिक नीति, नेतृत्व और प्रशासन से जुड़े विषयों पर अध्ययन किया।
साहित्य, संस्कृति और खेलों में भी रुचि
राजनीति और प्रशासन के अलावा अन्नामलाई की रुचि इतिहास, अध्यात्म, अर्थशास्त्र और राजनीति से जुड़ी पुस्तकों के अध्ययन में भी है। अपने भाषणों में वे अक्सर तमिल साहित्य के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का उल्लेख करते हैं।
उन्हें ट्रैकिंग करना, प्रकृति के बीच समय बिताना और तमिलनाडु की पारंपरिक संस्कृति से जुड़े रहना पसंद है। वे जलीकट्टू जैसे पारंपरिक खेलों और लोक कलाओं के समर्थक भी माने जाते हैं।
इसके अलावा वर्ष 2024 में उन्होंने कन्नड़ फिल्म ‘अरब्बी’ में एक स्विमिंग कोच की कैमियो भूमिका भी निभाई थी।
चुनाव हारने के बाद भी बनी रही सक्रियता
लोकसभा चुनाव 2024 में अन्नामलाई ने कोयंबटूर सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली। इसके बावजूद उन्हें लगभग 4.4 लाख वोट प्राप्त हुए और उनका वोट शेयर 30 प्रतिशत से अधिक रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रदर्शन तमिलनाडु में उनकी बढ़ती लोकप्रियता का संकेत माना गया। चुनाव परिणामों के बाद पार्टी ने भी कोयंबटूर क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों को भविष्य की संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना था।
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