बलिया जिला अस्पताल के दो चिकित्सकों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
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आशीष दुबे, बलिया
बलिया: जिला चिकित्सालय में तैनात रहे दो चिकित्सकों की कार्यप्रणाली को लेकर नया विवाद सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण यादव ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को अलग-अलग शिकायत पत्र भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों मामलों में सेवा नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे सरकारी व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। वहीं जिला अस्पताल प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अस्पताल में सभी कार्य नियमानुसार किए जाते हैं।
जनरल सर्जन की तैनाती और कार्यप्रणाली पर सवाल
शिकायत के अनुसार जिला चिकित्सालय में जनरल सर्जन के पद पर डॉ. एके जैसल ने 3 जुलाई 2025 को कार्यभार ग्रहण किया था। इसके बाद 3 जून 2026 को उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि लगभग 11 महीने के कार्यकाल के दौरान उन्होंने जनरल सर्जन के रूप में नियमित सेवाएं नहीं दीं। साथ ही उनके नाम से कोई कॉल ड्यूटी रोस्टर भी निर्धारित नहीं किया गया। इसके बावजूद पूरे कार्यकाल में उन्हें नियमित रूप से वेतन का भुगतान किया जाता रहा।
शिकायत में कहा गया है कि यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सेवा नियमों के उल्लंघन का मामला हो सकता है। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय की जानी चाहिए।
फिजिशियन के इस्तीफे को लेकर भी उठे प्रश्न
दूसरी शिकायत जिला चिकित्सालय के फिजिशियन डॉ. पंकज कुमार झा (एमडी मेडिसिन) से संबंधित है।
शिकायतकर्ता के अनुसार डॉ. झा ने 30 मार्च 2026 को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। आरोप है कि इसके बाद से उन्होंने चिकित्सकीय कार्य करना बंद कर दिया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सेवा नियमों के अनुसार एमडी मेडिसिन जैसे विशेषज्ञ चिकित्सक का इस्तीफा तत्काल स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित प्रक्रिया नियमों के अनुरूप अपनाई गई या नहीं।
सीएमएस से मांगी गई जानकारी का भी किया गया उल्लेख
सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण यादव का कहना है कि उन्होंने डॉक्टरों से जुड़े मामलों में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से जानकारी भी मांगी थी।
उनका आरोप है कि शिकायत किए जाने के लगभग एक माह बाद भी उन्हें अपेक्षित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका कहना है कि मामला गंभीर है और इसकी उच्चस्तरीय जांच होने पर सरकारी धन के उपयोग और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं।
लक्ष्मण यादव ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में पूरी पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। इसलिए उन्होंने राज्य सरकार से स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की है।
अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार
जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एस.के. यादव ने शिकायतकर्ता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा दी गई है। उनके अनुसार जानबूझकर विवाद उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला अस्पताल में सभी प्रशासनिक और चिकित्सकीय कार्य कानून और निर्धारित नियमों के तहत ही किए जाते हैं।
अधीक्षक का कहना है कि अस्पताल प्रशासन किसी भी प्रकार की अनियमितता का समर्थन नहीं करता और सभी प्रक्रियाएं विभागीय नियमों के अनुरूप संचालित होती हैं।
अब प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
दो अलग-अलग चिकित्सकों से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को शिकायत भेजे जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस पर क्या कदम उठाता है।
यदि शासन स्तर पर जांच के आदेश दिए जाते हैं तो आरोपों और अस्पताल प्रशासन के पक्ष दोनों की तथ्यात्मक जांच की जाएगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और क्या किसी स्तर पर सेवा नियमों का उल्लंघन हुआ है।
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