शिक्षामित्रों ने कलेक्ट्रेट में किया प्रदर्शन, सरकार से रखीं तीन बड़ी मांगें
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आशीष दुबे, बलिया
बलिया: उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के बैनर तले शनिवार को जिले के शिक्षामित्रों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर अपनी लंबित मांगों को लेकर आवाज उठाई। प्रदर्शन के बाद संघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शिक्षामित्रों से जुड़े कई मुद्दों को उठाते हुए सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई।
संघ का कहना है कि शिक्षामित्रों की समस्याओं का समाधान लंबे समय से लंबित है। ऐसे में सरकार को संवेदनशीलता के साथ इस विषय पर निर्णय लेना चाहिए ताकि हजारों परिवारों को राहत मिल सके।
समायोजन रद्द होने की बरसी पर मनाया गया ‘काला दिवस’
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिला अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने बताया कि 25 जुलाई को शिक्षामित्रों के समायोजन को निरस्त किए जाने की बरसी के रूप में याद किया जाता है। इसी कारण प्रदेशभर में इस दिन को “काला दिवस” के रूप में मनाया गया।
उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों ने अपने-अपने विद्यालयों में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया। इसके बाद दोपहर करीब 2 बजे बैठक आयोजित कर दिवंगत शिक्षामित्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके योगदान को याद किया गया।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद शिक्षामित्रों का प्रतिनिधिमंडल बलिया कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में शिक्षामित्रों की प्रमुख समस्याओं और उनके समाधान से संबंधित मांगों का उल्लेख किया गया।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर अपनी मांगें उठाई जा रही हैं, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर सकारात्मक पहल करने का आग्रह किया।
पहली मांग: दिवंगत शिक्षामित्रों के परिवारों को सहायता मिले
ज्ञापन में पहली प्रमुख मांग यह रखी गई कि जिन शिक्षामित्रों का निधन हो चुका है, उनके परिवार के एक सदस्य को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही आर्थिक सहायता या उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को भविष्य में आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
संघ का कहना है कि कई परिवार आज भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और उन्हें सरकारी सहयोग की आवश्यकता है।
दूसरी मांग: सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने की अपील
दूसरी मांग के तहत शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने की मांग की गई है।
संघ का कहना है कि सेवा अवधि बढ़ने से शिक्षामित्रों को अधिक समय तक रोजगार का अवसर मिलेगा और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर बनी रहेगी। इस मांग को लेकर लंबे समय से सरकार से निर्णय लेने का अनुरोध किया जा रहा है।
तीसरी मांग: टीईटी से छूट और समायोजन की मांग
ज्ञापन में तीसरी प्रमुख मांग के रूप में कहा गया कि जिस प्रकार कुछ श्रेणियों के शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के नियमों में राहत दी गई है, उसी प्रकार शिक्षामित्रों को भी टीईटी की अनिवार्यता से छूट प्रदान की जाए।
इसके साथ ही संघ ने प्रदेश के लगभग 60 हजार टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को शिक्षक पद पर समायोजित किए जाने की भी मांग दोहराई। पदाधिकारियों का कहना है कि इस विषय पर सरकार को शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त किया
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था सामान्य रही। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के प्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्राप्त किया। प्रशासन की ओर से ज्ञापन को नियमानुसार शासन तक भेजे जाने की प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और ज्ञापन सौंपने के बाद शिक्षामित्र वापस लौट गए।
संगठन ने सरकार से जल्द निर्णय की अपील
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षामित्र वर्षों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार यदि इन मांगों पर गंभीरता से विचार करती है तो हजारों शिक्षामित्रों और उनके परिवारों को राहत मिल सकती है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
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