ग्रामीणों ने श्रमदान से तैयार की बांस की पुलिया, महीनों से अधूरा पड़ा था निर्माण कार्य
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आशीष दुबे, बलिया
रेवती (बलिया)। विकास कार्यों की धीमी रफ़्तार से परेशान ग्रामीणों ने आख़िरकार अपनी समस्या का समाधान स्वयं ही निकाल लिया खरिका ग्राम पंचायत के भैंसहा – भाखर नाला पर महीनो से अधुरी पड़ी पुलिया के स्थान पर ग्रामीणों ने श्रमदान कर महज तीन दिन में बांस की चचरी पुलिया बनाकर आवागमन शुरू कराया गया।
महीनों से अधूरी थी पुलिया, बढ़ती रही परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार भैंसहा-भाखर नाला पर स्थायी पुलिया निर्माण का कार्य लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से मई 2026 में शुरू कराया गया था। निर्माण शुरू होने के कुछ समय बाद नाले का जलस्तर बढ़ गया, जिसके चलते कार्य रोक दिया गया। इसके बाद पुलिया का निर्माण दोबारा शुरू नहीं हो सका और ढांचा अधूरा ही पड़ा रहा।
पुलिया अधूरी रहने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। विशेष रूप से बारिश के दौरान नाला पार करना जोखिम भरा हो गया था। कई बार लोगों को लंबा चक्कर लगाकर दूसरे रास्तों से गुजरना पड़ता था।
तीन दिन तक चला श्रमदान, तैयार हुई बांस की पुलिया
लगातार बढ़ रही समस्या को देखते हुए गांव के लोगों ने स्वयं पहल करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से बांस और अन्य स्थानीय सामग्री की व्यवस्था की तथा श्रमदान के माध्यम से तीन दिनों में अस्थायी पुलिया तैयार कर दी।
रविवार को गांव के लोगों की मौजूदगी में पुलिया का उद्घाटन किया गया, जिसके बाद लोगों ने इसका उपयोग शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुलिया स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन जब तक पक्की पुलिया तैयार नहीं हो जाती, तब तक इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
करीब 10 हजार लोगों को मिला लाभ
नई पुलिया बनने से परसिया, कल्याणपुर, भैंसहा, कोलेन पांडेय का टोला और खरिका समेत आसपास के कई गांवों के लोगों को फायदा मिला है। स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग 10 हजार की आबादी इस मार्ग का उपयोग करती है।
इसके अलावा किसानों को खेतों तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। चार विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के लिए भी यह पुलिया राहत का माध्यम बनी है। पहले बच्चों को स्कूल पहुंचने में काफी कठिनाई होती थी, लेकिन अब उनका आवागमन आसान हो गया है।
बरसात में आवागमन था सबसे बड़ी चुनौती
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में नाले का जलस्तर बढ़ने के कारण लोगों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती थी। कई बार बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को नाला पार कराने के लिए अन्य लोगों की मदद लेनी पड़ती थी।
अस्थायी पुलिया बनने के बाद अब पैदल चलने वाले लोगों को पहले की तुलना में काफी सुविधा मिल रही है। हालांकि ग्रामीणों ने यह भी कहा कि स्थायी पुलिया का निर्माण जल्द पूरा कराया जाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
ग्रामीणों ने दिखाई एकजुटता
पुलिया निर्माण में गांव के अनेक लोगों ने श्रमदान किया। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सभी ने अपनी क्षमता के अनुसार श्रम और सामग्री का योगदान दिया। सामूहिक प्रयास के कारण कम समय में पुलिया तैयार हो सकी।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि सरकारी परियोजना समय पर पूरी हो जाती, तो लोगों को स्वयं इस प्रकार का कदम उठाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। फिर भी गांव के लोगों ने एकजुट होकर समस्या का अस्थायी समाधान निकाल लिया।
स्थायी पुलिया निर्माण पूरा कराने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि अधूरी पड़ी स्थायी पुलिया का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए। उनका कहना है कि बांस की पुलिया केवल अस्थायी व्यवस्था है और लंबे समय तक इसका उपयोग सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
लोगों का कहना है कि पक्की पुलिया बनने से क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों, किसानों, विद्यार्थियों और अन्य राहगीरों को स्थायी सुविधा मिलेगी तथा बरसात के मौसम में आवागमन की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
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