Breaking News

Monsoon Eye Infections: बारिश में आंखों की ये छोटी गलती पड़ सकती है भारी, जानें क्यों तेजी से बढ़ता है संक्रमण

Spread the love

मानसून में आंखों का संक्रमण क्यों बढ़ जाता है? जानें लक्षण, कारण और बचाव के आसान उपाय

देश दुनिया के ब्रेकिंग न्यूज और बाकी सभी अपडेट के लिए www.TheBoltaBharat.com का Whatsapp चैनल नीचे को  दिये गये लिंक को टैप/क्लिक करके जुड़ सकते हैं-Follow On Whatsapp

आशीष दुबे

मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी लेकर आता है। इस दौरान अधिकांश लोग त्वचा, पेट और वायरल बुखार जैसी परेशानियों पर ध्यान देते हैं, जबकि आंखों की देखभाल अक्सर नजरअंदाज हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में वातावरण में बढ़ी नमी, गंदा पानी और बैक्टीरिया-वायरस की सक्रियता के कारण आंखों में संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है।

अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए तो आंखों में लालपन, जलन, खुजली, पानी आना और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में संक्रमण तेजी से फैल भी सकता है। ऐसे में मानसून के दौरान आंखों की साफ-सफाई और सही देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है।

मानसून में आंखों का संक्रमण क्यों बढ़ जाता है?

बारिश के मौसम में वातावरण में नमी का स्तर बढ़ जाता है। यह नमी बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है। यही वजह है कि इस समय कंजंक्टिवाइटिस (आई फ्लू) समेत आंखों से जुड़े संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।

इसके अलावा बारिश के दौरान दूषित पानी, धूल-मिट्टी और प्रदूषण के कण भी आंखों के संपर्क में आ जाते हैं, जिससे संक्रमण या एलर्जी की आशंका बढ़ जाती है।

गंदे हाथों से आंखें छूना बन सकता है बड़ी वजह

दिनभर में हम कई सतहों को छूते हैं, जिन पर बैक्टीरिया और वायरस मौजूद हो सकते हैं। बिना हाथ धोए आंखों को छूने या रगड़ने से ये सीधे आंखों तक पहुंच जाते हैं। यही कारण है कि डॉक्टर हमेशा आंखों को छूने से पहले हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोने की सलाह देते हैं।

बारिश का गंदा पानी भी बढ़ाता है जोखिम

बारिश में भीगने के दौरान कई बार गंदा या दूषित पानी आंखों में चला जाता है। इससे आंखों में जलन, एलर्जी और संक्रमण की समस्या हो सकती है। यदि बारिश में भीग गए हों तो घर पहुंचकर साफ और स्वच्छ पानी से आंखों को धोना बेहतर माना जाता है।

कॉन्टैक्ट लेंस इस्तेमाल करने वालों को रखनी चाहिए अतिरिक्त सावधानी

मानसून के दौरान कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोगों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत होती है। लंबे समय तक लेंस पहनना या उनकी ठीक से सफाई न करना संक्रमण का कारण बन सकता है। यदि आंखों में लालपन या जलन महसूस हो तो कुछ दिनों के लिए चश्मे का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है खतरा

जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनमें संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और शरीर को हाइड्रेट रखना भी आंखों की सुरक्षा के लिए जरूरी माना जाता है।

आंखों में संक्रमण के सामान्य लक्षण

मानसून में यदि नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

* आंखों का लाल होना
* लगातार पानी आना
* खुजली और जलन महसूस होना
* आंखों में सूजन आना
* चिपचिपा या पीला स्राव निकलना
* तेज रोशनी से परेशानी होना
* आंखों में दर्द या भारीपन महसूस होना

यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या तेजी से बढ़ें तो नेत्र विशेषज्ञ से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।

मानसून में आंखों को सुरक्षित रखने के आसान उपाय

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ सामान्य आदतें अपनाना काफी मददगार हो सकता है।

* आंखों को छूने से पहले हमेशा हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।
* किसी अन्य व्यक्ति का तौलिया, रूमाल या आई मेकअप इस्तेमाल न करें।
* आंखों में खुजली होने पर उन्हें रगड़ने की बजाय साफ पानी से धोएं।
* कॉन्टैक्ट लेंस की नियमित सफाई करें और जरूरत पड़ने पर चश्मा पहनें।
* बारिश में भीगने के बाद आंखों को साफ पानी से जरूर धोएं।
* आंखों में संक्रमण होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप या दवा का उपयोग न करें।
* पौष्टिक भोजन करें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखें।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि आंखों में तेज दर्द हो, धुंधला दिखाई देने लगे, लगातार सूजन बनी रहे या आंखों से अधिक मात्रा में स्राव निकल रहा हो तो स्वयं इलाज करने की बजाय तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर उपचार मिलने से संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकता है और आंखों को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है।

Contact Us

Whatsapp

Follow

X/Twiter

Follow

Facebook

Follow

Instagram

Follow

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *