लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड की जांच ने पकड़ी रफ्तार
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आशीष दुबे
लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में कोचिंग सेंटर और एनीमेशन ट्रेनिंग संस्थान में लगी आग के मामले की जांच अब तेज हो गई है। मंगलवार सुबह विशेष जांच दल (SIT) और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल पर पहुंची और पूरे भवन को सील कर दिया। जांच एजेंसियां इमारत के भीतर मौजूद सभी तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों को एकत्र कर रही हैं ताकि आग लगने की वास्तविक वजह का पता लगाया जा सके।
प्रारंभिक जांच में एसी के कंप्रेसर के फटने और शॉर्ट सर्किट की आशंका सामने आई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी SIT
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के एडीजी प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। टीम को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
जांच का उद्देश्य आग लगने के कारणों के साथ-साथ सुरक्षा मानकों में हुई किसी भी लापरवाही और जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय करना है।
चार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई
घटना के बाद प्रशासन ने प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाए गए चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इनमें बिजली विभाग के एक्सईएन कलेक्शन गौरव कुमार, फायर विभाग के एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह, एलडीए के एई अनिल कुमार और जेई प्रमोद पांडे शामिल हैं।
इसके अलावा लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
छह लोगों के खिलाफ एफआईआर, चार गिरफ्तार
अलीगंज थाने में छह नामजद आरोपियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, पेट शॉप संचालक रामकृष्ण उपाध्याय, एनीमेशन सेंटर संचालक तूशॉक कृष्णा जायसवाल और किरायेदार सुरेश कुमार शाहू को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, नामजद आरोपी धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला की तलाश जारी है।
संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था के अनुसार मामले में अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
कैसे हुआ हादसा?
पुलिस के अनुसार अलीगंज के पुरनिया क्षेत्र स्थित इस बहुमंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप संचालित होती थी, जबकि पहली मंजिल पर उसी दुकान का वेयरहाउस था। दूसरी मंजिल पर थ्री-डी एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और 12वीं तक के छात्रों के लिए कोचिंग क्लास चल रही थी।
सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे वेयरहाउस में अचानक आग लग गई। कुछ ही मिनटों में आग और धुआं पूरी इमारत में फैल गया, जिससे ऊपरी मंजिलों पर मौजूद छात्र बाहर नहीं निकल सके।
दमकल, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया, लेकिन कई छात्र आग और धुएं के बीच फंस गए।
15 छात्रों की मौत, कई घायल
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 15 छात्रों के शव बरामद किए गए। वहीं, जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगाने वाले नौ छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। कई अन्य झुलसे हुए छात्रों की स्थिति भी चिकित्सकीय निगरानी में है।
प्रशासन ने घायलों के उपचार और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने ली उच्चस्तरीय बैठक
घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना
अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर पूरे मामले की समीक्षा की और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
फोरेंसिक जांच से खुलेगा हादसे का राज
फोरेंसिक टीम इमारत के विद्युत उपकरणों, एसी यूनिट, वायरिंग, वेयरहाउस की सामग्री और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। विशेषज्ञ यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि आग की शुरुआत किस स्थान से हुई और किस कारण से उसने इतनी तेजी से पूरे भवन को अपनी चपेट में लिया।
फिलहाल जांच पूरी होने तक इमारत को सील रखा गया है और किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
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