जंतर-मंतर प्रदर्शन की FIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, CJP ने 5 सितंबर का मार्च लिया वापस; सरकार ने किए तीन बड़े वादे
आशीष दुबे
नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक के विरोध में जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2026 को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIRs पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कई मामलों को समाप्त करने का आदेश दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध मार्च वापस लेने का ऐलान कर दिया।
यह पूरा मामला जुलाई में NEET-UG पेपर लीक के आरोपों और छात्रों के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में संबंधित मुद्दों पर कार्रवाई के साथ-साथ प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेना भी शामिल था। सरकार की ओर से इन मांगों पर आश्वासन दिए जाने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने FIR को लेकर क्या कहा?
1 सितंबर को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया। कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए CJP के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों से संबंधित FIRs को लेकर राहत दी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल हुए छात्रों और युवाओं के भविष्य पर इन आपराधिक मामलों का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। कोर्ट ने संबंधित FIRs को समाप्त करने का आदेश दिया और यह भी स्पष्ट किया कि उन्हीं घटनाओं के संबंध में आगे नई FIR दर्ज नहीं की जानी चाहिए।
यह आदेश केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली के अलावा बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम में दर्ज मामलों को भी अदालत के सामने रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसी अवधि की समान FIRs को आगे न बढ़ाने का निर्देश दिया।
20 से 25 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
दरअसल, जुलाई में NEET-UG 2026 पेपर लीक के आरोपों को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र प्रदर्शन हुए थे। दिल्ली में जंतर-मंतर भी इस आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा। प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर विवाद और हिंसा की घटनाओं के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की थीं।
बाद में प्रदर्शनकारियों की ओर से इन मामलों को वापस लेने की मांग उठाई गई। केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में FIRs को खत्म करने के लिए आवेदन किए गए। दिल्ली पुलिस ने भी अदालत से इन मामलों को समाप्त करने का अनुरोध किया था।
सरकार ने कोर्ट के सामने दिए तीन बड़े आश्वासन
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार के तीन आश्वासनों की जानकारी दी।
पहला, 20 से 25 जुलाई के बीच प्रदर्शन के संबंध में दर्ज FIRs पर आगे कार्रवाई नहीं की जाएगी।
दूसरा, उन्हीं घटनाओं के संबंध में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
तीसरा, NEET-UG 2026 पेपर लीक से जुड़ी परिस्थितियों में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की व्यवस्था करने की बात कही गई। सरकार ने इसके तौर-तरीके तैयार करने के लिए तीन महीने का समय मांगा है।
केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि सरकार छात्रों के भविष्य और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए अपने आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
CJP ने 5 सितंबर का विरोध मार्च क्यों वापस लिया?
FIRs और सरकार के आश्वासनों को लेकर 5 सितंबर को दिल्ली में एक और विरोध मार्च प्रस्तावित था। CJP ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में ही इस मार्च को वापस लेने की घोषणा कर दी।
CJP की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासनों और सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को देखते हुए 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च को वापस लेना उचित है। संगठन ने उम्मीद जताई कि सरकार अपने वादों को पूरी तरह लागू करेगी।
बाद में CJP की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया गया और कहा गया कि प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में से FIR वापस लेने की मांग पूरी हो गई है।
क्या सभी लोगों के खिलाफ मामले खत्म हो गए?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का मुख्य उद्देश्य उन छात्रों और युवाओं को राहत देना है जो प्रदर्शन में शामिल हुए थे। हालांकि, दिल्ली पुलिस को गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों के खिलाफ अलग कार्रवाई की अनुमति दी गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने ऐसे लोगों के मामले में जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला रखा है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि प्रदर्शन से जुड़े हर व्यक्ति के खिलाफ हर प्रकार की संभावित कार्रवाई हमेशा के लिए समाप्त हो गई है।
छात्रों के भविष्य को लेकर कोर्ट की अहम टिप्पणी
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अदालत ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखा। कोर्ट ने माना कि किसी आंदोलन में भाग लेने मात्र से छात्रों का भविष्य आपराधिक मामलों के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए।
अदालत के आदेश के बाद सरकार की ओर से भी छात्रों के हित और उनके भविष्य को प्राथमिकता देने की बात कही गई। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने FIRs वापस लेने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि युवाओं का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है।
NEET विवाद के बीच मुआवजे का मुद्दा भी अहम
इस पूरे घटनाक्रम में सिर्फ FIR वापस लेने का मुद्दा ही महत्वपूर्ण नहीं है। NEET-UG 2026 पेपर लीक से जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की व्यवस्था भी सरकार के आश्वासनों का हिस्सा है।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुआवजे के तौर-तरीके तैयार करने में लगभग तीन महीने का समय लगेगा। इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में इस संबंध में सरकार की ओर से अलग नीति या व्यवस्था सामने आ सकती है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शनों से संबंधित FIRs को लेकर प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिली है। साथ ही CJP द्वारा 5 सितंबर का प्रस्तावित दिल्ली मार्च भी वापस ले लिया गया है।
अब सरकार के सामने मुख्य चुनौती अपने तीनों आश्वासनों को लागू करने की है। FIRs को आगे न बढ़ाने, नई FIR दर्ज न करने और प्रभावित परिवारों के लिए
मुआवजे की व्यवस्था तैयार करने पर आने वाले समय में नजर रहेगी।

