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Ballia news :-बैरिया के 38 जर्जर विद्यालयों पर कार्रवाई की तैयारी, कब तक बनेंगे नए भवन? विभाग ने भेजी रिपोर्ट

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बैरिया के 38 जर्जर विद्यालयों पर होगी कार्रवाई, शासन से अनुमति मिलते ही शुरू होगा ध्वस्तीकरण

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आशीष दुबे, बलिया

बैरिया(बलिया):- बैरिया शिक्षा छेत्र के कुल 38 विद्यालयों का भवन जर्जर हो चुका है, शासन को रिपोर्ट भेजे जाने के बावजूद उन विद्यालयों के भवनो के ध्वस्तीकरण की अनुमति अभी तक विभाग द्वारा नहीं दी गई है

विद्यालयों की जर्जर स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई थी। कई भवनों में दरारें, कमजोर छत और क्षतिग्रस्त दीवारें होने के कारण वहां नियमित रूप से कक्षाएं संचालित करना सुरक्षित नहीं माना जा रहा था। ऐसे में विभाग ने इन भवनों का सर्वे कराकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की और शासन को भेज दी।

जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू

शिक्षा विभाग के अनुसार बैरिया शिक्षा क्षेत्र के कुल 38 विद्यालय भवन अब उपयोग योग्य नहीं रह गए हैं। इन भवनों को ध्वस्त करने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत भवनों को गिराया जाएगा और नए भवनों का निर्माण कराया जाएगा।

विभाग का कहना है कि जर्जर भवनों में बच्चों की पढ़ाई कराना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है। इसलिए पहले पुराने भवन हटाए जाएंगे और उसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

इन विद्यालयों को किया गया जर्जर घोषित

रिपोर्ट में बैरिया शिक्षा क्षेत्र के कई प्राथमिक, जूनियर हाई स्कूल और कंपोजिट विद्यालय शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से प्राथमिक विद्यालय बोलेहर, प्राथमिक विद्यालय कम्पोजिट बैरिया, प्राथमिक विद्यालय गुमानी का टोला, प्राथमिक विद्यालय दया छपरा, प्राथमिक विद्यालय कम्पोजिट मिर्जापुर, प्राथमिक विद्यालय श्रीनगर नंबर एक, प्राथमिक विद्यालय मिश्र के मठिया, कम्पोजिट विद्यालय मानगढ़, प्राथमिक विद्यालय उपाध्यायपुर, कम्पोजिट विद्यालय बेलछपरा, प्राथमिक विद्यालय बैजनाथपुर, प्राथमिक विद्यालय नेमछपरा, प्राथमिक विद्यालय मधुबनी नंबर दो, प्राथमिक विद्यालय दिलीप का छपरा, प्राथमिक विद्यालय धर्मबांधा, प्राथमिक विद्यालय गंगापुर नंबर एक, प्राथमिक विद्यालय सूरतमपुर, प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर, प्राथमिक विद्यालय बैरिया नंबर दो, प्राथमिक विद्यालय जानकीडीह, कम्पोजिट विद्यालय करनछपरा, प्राथमिक विद्यालय मधुबनी नंबर एक, प्राथमिक विद्यालय मधुबनी, प्राथमिक विद्यालय छपरा, कम्पोजिट विद्यालय राजागंज, कम्पोजिट विद्यालय शिवाल मठिया, प्राथमिक विद्यालय श्रीनगर नंबर दो, जूनियर हाई स्कूल टाड़ी, प्राथमिक विद्यालय टेघरी, प्राथमिक विद्यालय गढ़ी, प्राथमिक विद्यालय रामगढ़ और प्राथमिक विद्यालय जनतापुर नंबर एक सहित अन्य विद्यालय शामिल हैं।

बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई विद्यालय भवन काफी पुराने हो चुके हैं। समय के साथ उनकी संरचना कमजोर होती गई है। बरसात के मौसम में ऐसे भवनों में पढ़ाई कराना और अधिक जोखिम भरा हो जाता है। इसी कारण इन भवनों को अनुपयोगी मानते हुए उनके ध्वस्तीकरण का प्रस्ताव तैयार किया गया।

जब तक नए भवन नहीं बन जाते, तब तक विद्यालयों में वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

खंड शिक्षा अधिकारी ने क्या कहा

खंड शिक्षा अधिकारी फूल कुमार मिश्र ने बताया कि जर्जर विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण के लिए आवश्यक प्रस्ताव शिक्षा विभाग के माध्यम से शासन को भेज दिया गया है। अनुमति प्राप्त होते ही पुराने भवनों को नियमानुसार गिराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी और उसी स्थान पर नए भवनों का निर्माण कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

पहले भी भेजा गया था प्रस्ताव

जानकारी के अनुसार, इन विद्यालयों के भवनों के ध्वस्तीकरण के लिए विभाग ने पहले भी उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा था। हालांकि उस समय इस संबंध में अंतिम कार्रवाई नहीं हो सकी थी। अब एक बार फिर संशोधित रिपोर्ट के साथ अनुमति का अनुरोध किया गया है। विभाग को उम्मीद है कि अनुमति मिलने के बाद निर्माण प्रक्रिया में तेजी आएगी।

नए भवन बनने से मिलेगा बेहतर शैक्षणिक वातावरण

यदि शासन से जल्द अनुमति मिल जाती है तो पुराने और असुरक्षित भवनों की जगह नए विद्यालय भवन तैयार किए जाएंगे। इससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में भी सुधार होने की उम्मीद है।

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