सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज के दावे पर सवाल, मरीजों ने निजी जांच और मेडिकल स्टोर की पर्ची थमाने का लगाया आरोप
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आशीष दुबे, बलिया
जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को सरकारी दवाओं और जांच सुविधाओं का लाभ मिलने के बजाय बाहर से दवाइयां और निजी जांच लिखे जाने के आरोप सामने आए हैं। शुक्रवार को दो मरीजों ने अपनी पर्चियां दिखाते हुए दावा किया कि अस्पताल में चिकित्सकों ने उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने और निजी केंद्रों पर जांच कराने के लिए कहा। इससे सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दुबहर निवासी राजेश ने बताया कि कई दिनों से पेट दर्द की शिकायत होने पर वह शुक्रवार को जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। उनका आरोप है कि वहां डॉ. मनोज कुमार ने उनका करीब 650 रुपये का अल्ट्रासाउंड बाहर से कराने के लिए कहा और 512 रुपये की दवाएं भी निजी मेडिकल स्टोर से लिखीं। राजेश का कहना है कि जब सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आए हैं तो बाहर से दवा और जांच कराने की मजबूरी क्यों हो रही है।
इसी तरह बांसडीह निवासी निशा यादव ने बताया कि बुखार और कमजोरी की शिकायत लेकर वह ट्रॉमा सेंटर पहुंचीं। उनका आरोप है कि वहां डॉ. ए.एन. पांडेय ने करीब 800 रुपये की दवाएं और लगभग 400 रुपये की जांच बाहर से लिखी। उन्होंने कहा कि गरीब मरीजों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बड़ी परेशानी बन जाता है।
मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि यह कोई एक दिन की समस्या नहीं है। अस्पताल में दवाओं और जांच सुविधाओं के बावजूद कई मरीजों को बाहर भेजा जाता है। इससे मरीजों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ इलाज में भी देरी होती है।
मरीज पहुंचे ओपीडी, कई ने बाहर की दवा लिखे जाने की जताई नाराजगी
शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 1100 मरीजों ने इलाज कराया। इस दौरान कई मरीजों और तीमारदारों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में सभी दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं और उन्हें निजी मेडिकल स्टोर तथा जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है। मरीजों ने प्रशासन से व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
बोले जिम्मेदार
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. सुजीत कुमार यादव ने कहा कि सरकारी अस्पताल में बाहर की दवाइयां लिखने पर पूरी तरह रोक है। यदि कोई चिकित्सक नियमों का उल्लंघन कर रहा है तो मामले की जांच कर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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