लखनऊ हादसे के बाद खुली पोल, तंग गलियों और बेसमेंट में चल रहे कोचिंग संस्थानों पर बड़ा सवाल
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आशीष दुबे, बलिया
लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में आग लगने से 15 छात्रों की मौत के बाद पूरे प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। इस बीच बलिया से जो तस्वीर सामने आई है, वह अभिभावकों की चिंता बढ़ाने वाली है। जिले में 1200 से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में वर्तमान समय में सिर्फ एक संस्थान ही पंजीकृत है।
सबसे चिंताजनक स्थिति शहर के द्वारिकापुरी इलाके की है, जहां तंग गलियों में 50 से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई बेसमेंट और संकरे भवनों में चल रहे हैं। यदि किसी प्रकार की आग या अन्य आपदा की घटना होती है तो वहां तक फायर ब्रिगेड के वाहन पहुंचना भी मुश्किल हो सकता है।
जानकारों का कहना है कि अधिकांश संस्थानों में न तो अग्निशमन उपकरण हैं और न ही आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था। बावजूद इसके बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं रोजाना यहां पढ़ने पहुंच रहे हैं।
जिले में पांच वर्ष पहले 15 कोचिंग संस्थानों ने पंजीयन कराया था, लेकिन तीन वर्ष बाद पंजीयन का नवीनीकरण नहीं कराया गया। वर्तमान में सिर्फ एक कोचिंग संस्थान ही पंजीकृत बताया जा रहा है। इसके बावजूद जिले भर में कोचिंग संस्थानों का संचालन जारी है।
बैरिया, फेफना, मनियर, सिकंदरपुर, बेल्थरारोड, नगरा, रसड़ा और अन्य कस्बों में भी बिना पंजीयन के बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। कई जगहों पर क्षमता से अधिक छात्रों को छोटे-छोटे कमरों में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।
हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार?
कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे हजारों छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अधिकांश अभिभावकों को यह तक जानकारी नहीं है कि जिस भवन में उनका बच्चा पढ़ने जा रहा है, वहां फायर सेफ्टी की व्यवस्था है या नहीं।
नियम क्या कहते हैं?
शिक्षा मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार कोचिंग संस्थानों के लिए पंजीयन, अग्निशमन उपकरण, भवन सुरक्षा प्रमाणपत्र, आपातकालीन निकास द्वार, फीस रजिस्टर और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। लेकिन जिले में अधिकांश संस्थानों में इन नियमों का पालन होता नजर नहीं आता।
20 की जगह बैठ रहे 50 छात्र
सूत्रों के अनुसार कई कोचिंग संस्थानों में 20 विद्यार्थियों की क्षमता वाले कमरों में 50 से अधिक छात्रों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इससे किसी भी आपात स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है।
क्या बोले डीआईओएस?
जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार मिश्र ने बताया कि जिले में कोचिंग संस्थानों की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। मानकों के विपरीत संचालित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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