ईरान के तेल पर मिली बड़ी राहत, भारत को अरबों की बचत की उम्मीद
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आशीष दुबे
नई दिल्ली। दुनिया के ऊर्जा बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जिस ईरान के तेल पर करीब एक दशक तक सख्त प्रतिबंध लगे रहे, अब उसी ईरानी तेल को वैश्विक बाजार में वापस लाने की शुरुआत अमेरिका ने कर दी है।
अमेरिका द्वारा ईरान को सीमित अवधि के लिए तेल उत्पादन और निर्यात की छूट दिए जाने के बाद दुनिया भर के तेल आयातक देशों की नजर इस फैसले पर टिक गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी तेल की बाजार में वापसी से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव बनेगा।
इसका सबसे बड़ा फायदा भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को मिल सकता है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करते हैं।
भारत के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कभी ईरान देश के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था।
प्रतिबंधों के कारण भारत को ईरानी तेल खरीदना बंद करना पड़ा था, लेकिन अब बाजार में एक नया विकल्प मिलने से भारत की सौदेबाजी की ताकत बढ़ सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम है।
भारतीय रिफाइनरियों के पास पहले से पर्याप्त तेल भंडार मौजूद हैं और खुदरा कीमतें कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं। इसके बावजूद आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर दिखाई दे सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति लगातार बढ़ती रही तो भारत का आयात बिल कम होगा, महंगाई पर दबाव घटेगा और लंबे समय में उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है।
भारत के लिए क्यों अहम है ईरानी तेल?
भारत कभी ईरान से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल था। 2018 तक ईरान भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत को खरीद बंद करनी पड़ी। अब छूट मिलने से भारत को फिर एक अतिरिक्त आपूर्ति विकल्प मिल सकता है।
कब सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल?
विशेषज्ञों के अनुसार ईंधन की कीमतों में किसी बड़ी राहत के लिए 5 से 6 महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल लगातार सस्ता होता है तो इसका असर धीरे-धीरे भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।
क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?
भारत का आयात बिल कम हो सकता है
महंगाई पर नियंत्रण में मदद मिलेगी
तेल आपूर्ति के विकल्प बढ़ेंगे
ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी
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