एनीमिया नहीं, शरीर में खून की अधिकता भी खतरनाक; समय रहते जांच और इलाज जरूरी
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आशीष दुबे
आमतौर पर लोग खून की कमी (एनीमिया) को ही स्वास्थ्य के लिए खतरनाक मानते हैं, लेकिन शरीर में खून का जरूरत से ज्यादा होना भी गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है।
चिकित्सकों के अनुसार लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) की संख्या सामान्य से अधिक हो जाने की स्थिति को पॉलीसाइथीमिया (Polycythemia) कहा जाता है। इस बीमारी में खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे शरीर में रक्त प्रवाह प्रभावित होने लगता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक तथा रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान, फेफड़ों की बीमारियां, लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी, डिहाइड्रेशन और बोन मैरो से जुड़ी कुछ समस्याएं इसके प्रमुख कारण हो सकती हैं। मरीजों में सिरदर्द, चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना, थकान और त्वचा में खुजली जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।
शुरुआत में बिना लक्षण के भी हो सकती है बीमारी
डॉक्टरों के अनुसार कई मामलों में पॉलीसाइथीमिया शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के मौजूद रहती है। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच और रक्त परीक्षण के जरिए ही इसकी पहचान संभव हो पाती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।
केस स्टडी: सांस फूलने और धुंधला दिखने की शिकायत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली के एक 35 वर्षीय युवक को सांस लेने में परेशानी और धुंधला दिखाई देने की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में पता चला कि उसके शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या सामान्य से अधिक थी, जिससे खून गाढ़ा हो गया था। चिकित्सकों की सलाह और जीवनशैली में बदलाव के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
डॉ. आकाश सिंह के अनुसार, “खून की अधिकता भी उतनी ही गंभीर समस्या है जितनी खून की कमी। जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो रक्त का प्रवाह धीमा पड़ सकता है। इससे रक्त के थक्के बनने, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।”
इन बातों का रखें ध्यान
●नियमित ब्लड टेस्ट कराएं।
●धूम्रपान से दूरी बनाएं।
●पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
●रोजाना व्यायाम करें।
●किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें।
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