कटान के खतरे से चिंतित नौरंगा-भुवाल छपरा के लोगों ने खुद शुरू किया धारा मोड़ने का अभियान
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आशीष दुबे, बलिया
बाढ़ और कटान के बढ़ते खतरे के बीच नौरंगा-भुवाल छपरा के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन की ओर से ठोस पहल न होने पर खुद ही मोर्चा संभाल लिया है।
गांव को संभावित कटान से बचाने के लिए ग्रामीण अपने संसाधनों से गंगा नदी की धारा मोड़ने के प्रयास में जुट गए हैं। इसके लिए नदी में बांस-बल्लियों का बम्बूक्रेट बनाकर मिट्टी और बालू से भरी बोरियां डाली जा रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा नदी की दो धाराएं बह रही हैं, जिनमें से एक धारा सीधे नौरंगा-भुवाल छपरा गांव की ओर बढ़ रही है। बाढ़ के दौरान यह धारा गांव के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इस संबंध में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
गांव के लोगों ने बताया कि यदि समय रहते धारा को नियंत्रित नहीं किया गया तो बाढ़ के दिनों में बड़े पैमाने पर कटान हो सकती है। इसी आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान और आर्थिक सहयोग से धारा को एक दिशा में मोड़ने का अभियान शुरू किया है।
ग्रामीणों की इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है। अभियान में राजू ठाकुर, रविंद्र ठाकुर, उमाशंकर ठाकुर, बाला ठाकुर, घुट्टी ठाकुर, झुनू, दिनेश, उमेश, मनु ठाकुर, विनय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
ग्रामीणों का दर्द
ग्रामीणों का आरोप है कि कटान रोकने के लिए समय रहते स्थायी उपाय नहीं किए गए। उनका कहना है कि गांव को बचाने की जिम्मेदारी अब खुद ग्रामीणों ने अपने कंधों पर उठा ली है। उनका उद्देश्य बाढ़ से पहले गंगा की धारा को नियंत्रित कर गांव को सुरक्षित करना है।
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