गौरव नर्सिंग होम में इलाज को लेकर हुई शिकायत की जांच रिपोर्ट पर विवाद, पीड़ित ने रिपोर्ट को गलत बताते हुए दोबारा जांच की मांग की
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आशीष दूबे, बलिया
बलिया में एक निजी अस्पताल के खिलाफ की गई शिकायत की जांच रिपोर्ट को लेकर मंगलवार को सीएमओ कार्यालय में हंगामा हो गया। मिश्रा नेउरी निवासी कन्हैया मिश्रा ने जांच रिपोर्ट को गलत बताते हुए विरोध जताया और जांच में शामिल चिकित्सक पर रुपये मांगने का आरोप लगाया।
कन्हैया मिश्रा का कहना है कि उनकी माता स्व. सुन्दरावती देवी का उपचार एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) के अंतर्गत गौरव नर्सिंग होम में 14 सितंबर 2024 से 19 सितंबर 2024 तक कराया गया था।
उनका आरोप है कि अस्पताल में गलत इलाज के कारण उनकी माता को लकवा मार गया और बाद में 27 अक्टूबर 2025 को उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने इलाज से जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी का भी आरोप लगाया है।
शिकायत के बाद बनी थी जांच समिति
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने इस मामले में कई बार स्वास्थ्य विभाग को लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई थी।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध क्लिनिकल रिकॉर्ड के अनुसार अस्पताल द्वारा ऐसी किसी दवा के प्रयोग का प्रमाण नहीं मिला जिससे मरीज को लकवा हुआ हो।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मरीज को पहले से डायबिटीज और मोटापे की समस्या थी तथा उन्हें आंखों में पीलापन, भूख न लगना, उल्टी, बुखार और कमजोरी की शिकायत के कारण भर्ती किया गया था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मरीज की मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम नहीं कराया गया, जिसके कारण मृत्यु के कारणों पर निश्चयात्मक निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।
हालांकि जांच में यह पाया गया कि अस्पताल ने ईसीएचएस भुगतान के लिए मरीज को नॉर्मल डिस्चार्ज दिखाया, जबकि उच्च चिकित्सा केंद्र भेजते समय रेफरल डिस्चार्ज दर्शाया गया।

जांच अधिकारी पर रुपये मांगने का आरोप
सीएमओ कार्यालय पहुंचे कन्हैया मिश्रा ने जांच रिपोर्ट को गलत बताते हुए विरोध जताया और आरोप लगाया कि जांच में शामिल डॉ. अभिषेक मिश्रा ने पांच लाख रुपये की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सही नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में डॉ. अभिषेक मिश्रा ने बताया कि उन पर लगाया गया आरोप गलत है।
जांच समिति में जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. अभिषेक मिश्रा, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. योगेन्द्र दास और जिला चिकित्सालय के फिजिशियन डॉ. विनोद कुमार शामिल थे। शिकायतकर्ता ने रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए मामले में दोबारा जांच की मांग की है।
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