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नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र लगातार दूसरे दिन भी सुचारू रूप से नहीं चल सका। विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (Special Index Revision – SIR) के मुद्दे पर विपक्ष के तीखे विरोध और नारेबाजी ने दोनों सदनों की कार्यवाही को दिनभर बाधित रखा। सरकार और विपक्ष के बीच टकराव इस कदर बढ़ गया कि संसद में कामकाज ठप रहा और सदन कई बार स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष की मांग: पहले SIR पर चर्चा, फिर कोई और काम
शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के सांसद तख्तियां लेकर वेल में पहुंच गए। “SIR पर तुरंत चर्चा करो”, “लोकतंत्र बचाओ” जैसे नारे लगाए गए। विपक्ष का कहना था कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कोई साधारण प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे नागरिकता, मताधिकार और पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण विषय जुड़े हैं, जिन पर तत्काल बहस होना आवश्यक है।
विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुईं, कई स्थानों पर मतदाता सूची से नाम हटाए गए, और कई बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की मौतों ने भी इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा—
“यह मामला प्रशासनिक नहीं, लोकतांत्रिक है। इससे लाखों लोगों के वोट प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए तत्काल बहस होनी चाहिए।”
सरकार का जवाब: चर्चा के लिए तैयार, पर प्रक्रिया का पालन जरूरी
केंद्र सरकार का कहना है कि वह SIR पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन संसद के निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पालन करते हुए ही बहस शुरू हो सकती है। सरकार ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल राजनीतिक कारणों से हंगामा कर रहा है और सत्र को बाधित करने की कोशिश में है।
केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा—
“बिहार चुनाव में हार का गुस्सा सदन में मत निकालिए।”
इस बयान के बाद विपक्ष और भड़क गया, जिससे हंगामा और तेज हो गया।
स्पीकर ने बार-बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन विपक्ष के शोर-शराबे के कारण प्रश्नकाल चलाना संभव नहीं हो पाया। आखिरकार सदन को पहले दोपहर तक, फिर कुछ समय के लिए और अंत में पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा।
दर्शक गैलरी में बैठे विदेशी प्रतिनिधिमंडल के सामने हंगामा
लोकसभा में मौजूद एक विदेशी प्रतिनिधिमंडल भी इस अव्यवस्थित स्थिति का प्रत्यक्ष रूप से गवाह बना। संसद जैसे लोकतांत्रिक संस्थान में लगातार हो रही नारेबाजी, वेल में प्रदर्शन और अवरोध ने सभी का ध्यान खींचा। कई सदस्य असहज दिखे और विपक्ष–सरकार के बीच तीखी नोकझोंक को नोट करते रहे।
राज्यसभा में भी नहीं थमा विवाद
ऊपरी सदन राज्यसभा का माहौल भी लोकसभा जैसा ही रहा। विपक्ष ने नियम 267 के तहत कई नोटिस दिए थे, जिसमें SIR मुद्दे पर सामान्य कामकाज स्थगित कर तत्काल चर्चा की मांग की गई थी।
सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सारे नोटिस खारिज करते हुए कहा कि वे प्रक्रियागत रूप से मान्य नहीं हैं। इस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि
“नोटिसों को खारिज करने की घोषणा पारंपरिक तरीके से नहीं की गई, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठता है।”
राज्यसभा के भीतर भी नारेबाजी जारी रही। विपक्ष की मांग थी कि SIR में गंभीर खामियां हैं और यह नागरिक अधिकारों से सीधा जुड़ा मुद्दा है, इसलिए इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं, सरकार अपने रुख से नहीं हटी और कहा कि “विपक्ष सत्र का नुकसान कर रहा है, बहस निर्धारित समय पर ही होगी।”
विरोध और वाकआउट: सत्र का दूसरा दिन भी संशय में
विपक्ष की नाराजगी बढ़ती रही और अंत में कई विपक्षी दलों ने वाकआउट कर दिया। उनका आरोप था कि सरकार संवेदनशील विषयों पर चर्चा से भाग रही है। विपक्षी नेताों ने कहा कि सत्र का मतलब सिर्फ सरकारी विधेयकों को पास कराना नहीं है, बल्कि जनता के प्रश्नों पर बहस करना भी है।
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि
“नियमों को तोड़े बिना ही चर्चा संभव है। विपक्ष जानबूझकर अवरोध पैदा कर रहा है।”
SIR विवाद: मुद्दा क्या है?
विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी SIR एक विशेष प्रक्रिया है, जिसमें देशभर में मतदाता सूचियों का सत्यापन किया जाता है। विपक्ष का दावा है कि—
कई मतदाताओं के नाम अचानक काट दिए गए
नए नाम जोड़ने में लापरवाही
BLO पर दबाव
प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी
कई BLO की मौत, जिससे प्रशासनिक लापरवाही उजागर होती है
सरकार का कहना है कि यह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी भी विसंगति पर कार्रवाई की जाएगी।
अगले दिनों में क्या होगा?
संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही जिस तरह से हंगामे में बीत गया, उससे आने वाले दिनों का सत्र भी विवादों में घिरा नजर आ रहा है। SIR पर चर्चा के बिना विपक्ष मानने के मूड में नहीं है, जबकि सरकार अपनी प्रक्रियागत शर्तों पर अड़ी है। ऐसे में यह टकराव आगे कितना बढ़ेगा, यह सत्र की गति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
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