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सर्दियों ने दस्तक दे दी है और तापमान गिरते ही देशभर में हार्ट अटैक के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। यह ट्रेंड कोई नया नहीं है। हर वर्ष दिसंबर से फरवरी तक हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अचानक मौत के मामलों में 25 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की जाती है।
डॉक्टरों के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर की रक्त धमनियाँ सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और दिल पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि जिन लोगों को पहले से हार्ट से जुड़ी बीमारी, बीपी, शुगर या कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उनमें खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
इसी बढ़ते खतरे के बीच, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. साकेत गोयल ने एक महत्वपूर्ण बात बताई है—एक ऐसी 20 से 40 पैसे वाली सस्ती गोली, जो हार्ट अटैक के दौरान मौत के ख़तरे को 25 से 28 प्रतिशत तक कम कर सकती है। यह गोली हर व्यक्ति को अपने साथ रखनी चाहिए।
सर्दियों में क्यों बढ़ जाते हैं हार्ट अटैक?
ठंड में शरीर अपनी गर्मी बनाए रखने के लिए प्राकृतिक रूप से रक्त धमनियों (ब्लड वेसल्स) को सिकोड़ देता है। धमनियाँ सिकुड़ने पर:
ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है
हार्ट को ब्लड पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है
दिल पर अचानक प्रेशर बढ़ने से हार्ट अटैक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है
जिन लोगों की नसें पहले से कोलेस्ट्रॉल के कारण संकरी हो चुकी हैं या जिनका ब्लड प्रेशर पहले से हाई रहता है, उन्हें अधिक खतरा होता है।
हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण जिन्हें बिल्कुल न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों के अनुसार, हार्ट अटैक हमेशा अचानक नहीं होता। इसके कुछ संकेत होते हैं जो अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं:
सीने में दबाव जैसा दर्द या जकड़न, दोनों हाथों में भारीपन या दर्द, कंधों, पीठ या जबड़े में अकड़न, अचानक पसीना आना, घबराहट या सांस फूलना, उलझन या बेचैनी, सीने में जलन जिसे लोग अक्सर गैस समझ लेते हैं, ऐसे किसी भी लक्षण के दिखते ही तुरंत कदम उठाना जरूरी है।
यह 20–40 पैसे की गोली कर सकती है जान बचाने का काम
डॉ. पीके जहा के अनुसार डिस्प्रिन/एस्पिरिन की एक सादी गोली हार्ट अटैक में लाइफ सेविंग साबित हो सकती है।
“अगर किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक का शक भी हो, तो तुरंत एक डिस्प्रिन चबाकर खिला दें।
यह दवा खून को पतला करती है और हार्ट की नलियों में बन रहे खून के थक्के को जमने से रोकती है।
इससे मरीज की जान बचने की संभावना 25–28% तक बढ़ जाती है।”
—डॉ. पीके झा
कब और कैसे दें यह गोली?
यह गोली तभी असर दिखाती है जब इसे चबाकर खाया जाए। इसके बाद थोड़ा पानी पीना चाहिए।
किसी भी हालत में: मरीज को अकेला न छोड़ें, उसे लेटने न दें, बल्कि आधा बैठने की स्थिति में रखें, तुरंत एम्बुलेंस बुलाएँ या अस्पताल ले जाएँ,
अस्पताल पहुंचते ही ECG करवाएं, हार्ट स्पेशलिस्ट को दिखाएं, डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती 30 मिनट सबसे अहम होते हैं। इस दौरान मिल गया सही उपचार तो जान बच सकती है।
जाने क्या है दवा का नुकसान दवा का नुकसान?
डॉक्टरों के अनुसार, डिस्प्रिन का कोई बड़ा नुकसान नहीं है, लेकिन सावधानी रखें:
अगर व्यक्ति को ब्लीडिंग डिसऑर्डर है, किसी प्रकार का बड़ा ऑपरेशन हुआ है, खून पतला करने की दवा चल रही है, तो पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। लेकिन इमरजेंसी में यह गोली देना सुरक्षित माना जाता है।
यह भी जानें—चेस्ट पेन हमेशा गैस नहीं होती
कई लोग सीने में दर्द को हमेशा गैस समझते हैं और दवा लेकर बैठ जाते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार यह बड़ी गलती है।
क्योंकि अक्सर हार्ट अटैक का दर्द गैस जैसा लगता है।
बारंबार होने वाली: छाती में जलन, भारीपन, गैस को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।
कैसे बचें हार्ट अटैक से? डॉक्टरों की सलाह
ठंड में सुबह जल्दी न निकलें, ठंडी हवा में एक्सरसाइज न करें, मध्यम गति से वॉक करें, BP, Sugar, Cholesterol नियमित जांचें, अधिक तेल, घी, तला-भुना कम करें, स्ट्रेस से बचें, रोज 7 घंटे की नींद जरूर लें, धूम्रपान और शराब पूरी तरह बंद करें
नतीजा: आपकी जेब में रखी 20 पैसे की गोली… बचा सकती है आपकी जान
डॉक्टरों के अनुसार हर व्यक्ति, खासकर जिनको BP, Sugar, Cholesterol या पहले हार्ट की समस्या रही है —
उन्हें डिस्प्रिन अपनी जेब में जरूर रखनी चाहिए।
ठंड के मौसम में यह छोटी सी गोली जिंदगी और मौत के बीच का फासला कम कर सकती है।
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