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तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और भागदौड़ भरी दिनचर्या में लोग कई घंटों तक चलने-फिरने, खड़े रहने और काम करने में जूतों पर निर्भर रहते हैं।
लेकिन अक्सर लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते कि उनके जूते कब खराब हो चुके हैं और कब उन्हें बदल देना चाहिए। समय पर जूते न बदलना न केवल पैरों में दर्द का कारण बन सकता है बल्कि कमर दर्द, पोश्चर खराब होना, सूजन और यहां तक कि मसल्स इंजरी तक पैदा कर सकता है।
एक हालिया फिटनेस रिपोर्ट के अनुसार, 70% लोग अपने जूतों को तब तक पहनते रहते हैं जब तक वे पूरी तरह फट न जाएं, जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक जूतों की असली उम्र उनके दिखने से नहीं बल्कि उनकी “कुशनिंग और सपोर्ट” से तय होती है।
कब समझें कि जूते बदलने का समय आ गया है?
1. सोल का घिस जाना — सबसे पहला संकेत
जूते का सोल पैरों के लिए कुशन का काम करता है। यदि यह हिस्सा घिस जाए, पतला हो जाए या एक तरफ से ज्यादा दब जाए तो इसका सीधा मतलब है कि आपका जूता अब झटकों को झेलने में सक्षम नहीं है। ऐसे में चलने पर एड़ी और घुटनों में दर्द होना शुरू हो जाता है।
2. कुशनिंग का खत्म हो जाना
नए जूतों में एक तरह की उछाल और आराम होता है, लेकिन समय के साथ चलते-चलते कुशनिंग दब जाती है। यदि जूते पहनने पर पैरों में भारीपन या सूजन महसूस हो, तो समझ लें कि मिडसोल खराब हो चुका है। इसका असर पूरे बॉडी बैलेंस पर पड़ता है और लंबे समय तक इस्तेमाल करने से चोट लगने का खतरा रहता है।
3. दर्द या खिंचाव महसूस होना
यदि जूते पहनने पर एड़ी, तलवे, पिंडली या कमर में खिंचाव होने लगे, तो यह साफ संकेत है कि जूते अपनी सपोर्ट क्षमता खो चुके हैं। पुराने जूते पैरों को सही एलाइनमेंट नहीं दे पाते, जिससे धीरे-धीरे पेन बढ़ता जाता है।
4. जूते का आकार बिगड़ जाना
अगर आपकी चप्पल या जूता एक तरफ से झुक गया हो या नीचे का पैटर्न तिरछा हो गया हो, तो यह खतरे की घंटी है। ऐसे जूते शरीर के वजन को बराबर नहीं झेल पाते और पोश्चर गड़बड़ा जाता है।
क्यों जल्दी खराब होते हैं जूतें?
विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग रोज़ 5–8 किमी चलते हैं, जॉगिंग करते हैं या दिनभर खड़े रहते हैं, उनके जूते औसत व्यक्ति की तुलना में 40% तेजी से खराब होते हैं। ऐसे लोगों को हर 6–8 महीने में अपना फुटवियर बदल देना चाहिए।
इसके अलावा गर्म मौसम, बार-बार पानी लगना, अधिक वजन और कठोर सतह पर चलना भी जूतों की उम्र कम कर देता है।
ऊपर से ठीक दिखते जूते भी हो सकते हैं खराब
कई जूते ऊपर से बिलकुल नए जैसे दिखते हैं, लेकिन असल खराबी सोल और मिडसोल में होती है, जो आंखों से नहीं दिखती। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर तीन महीने में जूतों को मरोड़कर और दबाकर उनकी स्थिति जांचनी चाहिए।
सही समय पर जूते बदलना क्यों जरूरी?
पैरों के दर्द और सूजन से बचाव
कमर और घुटनों पर दबाव कम
चलने-फिरने की स्पीड बेहतर
पोश्चर सुधरता है
स्पोर्ट्स इंजरी का खतरा घटता है
जिस तरह एक वाहन का खराब टायर दुर्घटना का कारण बन सकता है, उसी तरह खराब जूते धीरे-धीरे आपके पूरे शरीर की सेहत पर असर डालते हैं।
कैसे चुनें नए जूते?
कुशनिंग सॉफ्ट और लचीली हो
हील सपोर्ट मजबूत हो
आपका पैर आराम से फिट हो, दबाव न बने
हल्के वजन वाले जूते प्राथमिकता दें
रोजमर्रा, रनिंग और वॉकिंग—तीनों के अलग जूते रखें
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