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शव वाहन में पाँच दिन से डीज़ल ख़त्म! मौत के बाद भी शव वाहन के लिए भटकते रहे परिजन, अस्पताल प्रशासन ने खोली लापरवाही की पोल

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बलिया। मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाओं में एक बार फिर जिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई है। बैरिया थाना क्षेत्र के सुरेमनपुर निवासी कौशल यादव (35) की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजन अस्पताल में घंटों तक शव वाहन के लिए भटकते रहे। परिजन आरोप लगाते हैं कि अस्पताल के अधिकारियों ने मदद करने के बजाय जिम्मेदारी एक-दूसरे पर थोपते हुए उन्हें परेशान किया।

मृतक के भाई कृष्णा यादव ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे वे कौशल को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां करीब 11 बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत के बाद शव ले जाने के लिए परिजन जब सीएमएस कार्यालय पहुंचे तो उन्हें वहां से टका-सा जवाब मिला।

परिजनों के अनुसार, सीएमएस डॉ. एस.के. यादव ने शव वाहन उपलब्ध कराने के बजाय एम्बुलेंस नोडल अधिकारी डॉ. विनेश कुमार का हवाला देते हुए कहा—
“जाओ, नोडल से बात करो!”

इस परिजनों ने नाराज़ होकर सीएमएस कार्यालय में जमकर हंगामा किया। काफी देर के बाद सीएमएस ने किसी तरह डीज़ल की व्यवस्था कर शव को गांव भेजने का प्रबंध कराया।

पाँच दिन से शव वाहनों में डीज़ल ख़त्म!

सूत्र बताते हैं कि जिला अस्पताल में संचालित शव वाहनों में पिछले पाँच दिनों से डीज़ल नहीं है, लेकिन शिकायतों के बावजूद भी अस्पताल प्रशासन पूरी तरह बेपरवाह बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि लगातार शिकायतों के बावजूद किसी जिम्मेदार अधिकारी ने स्थिति सुधारने की जहमत तक नहीं उठाई।

जब इस मामले में नोडल अधिकारी डॉ. विनेश कुमार से सवाल पूछा गया तो उन्होंने चिर-परिचित सफाई देते हुए कहा—
“डीज़ल पर्याप्त है… खत्म होने की जानकारी नहीं मिली है।”

उनका यह बयान अस्पताल की जमीनी हकीकत से पूरी तरह अलग नजर आया।

प्रशासन की उदासीनता पर सवाल

ऐसे समय में, जब परिवार अपने प्रियजन की मौत के शोक में डूबा हो, अस्पताल का उन्हें इस तरह दर-दर भटकाना न सिर्फ अमानवीय है बल्कि सरकारी सिस्टम की गंभीर लापरवाही को भी उजागर करता है। सवाल यह है कि अगर शव वाहन तक के लिए डीज़ल नहीं मिल पा रहा, तो अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का क्या हाल होगा?

अधिकारियों के ढुलमुल रवैये ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं की सुध लेने वाला कोई नहीं। अब देखना यह है कि क्या उच्च अधिकारी इस मामले पर कार्रवाई करते हैं या फिर यह घटना भी सरकारी फाइलों में धूल फांकती रह जाएगी।

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