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UP में बढ़ी धार्मिक आस्था: एक साल में तीन गुना बढ़े धार्मिक संगठन, समाजसेवा और शिक्षा क्षेत्र में भी नई सक्रियता

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले एक वर्ष के भीतर धार्मिक आस्था और सामाजिक संगठनों की सक्रियता में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली है। धर्म, समाजसेवा, शिक्षा, खेल, अपार्टमेंट प्रबंधन और कला-साहित्य से जुड़े ट्रस्ट व सोसाइटीज़ की संख्या ने नया इतिहास रच दिया है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक धार्मिक क्रियाकलापों से जुड़े संगठनों की संख्या जहां मात्र एक साल में 2250 से बढ़कर 6363 हो गई, वहीं समाजसेवा से जुड़े संगठनों ने भी 67 हजार से बढ़कर 70 हजार का आंकड़ा छू लिया है।

यह वृद्धि प्रदेश में बदलते सामाजिक माहौल, धार्मिक गतिविधियों की बढ़ती लोकप्रियता और ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा के कारण देखने को मिल रही है।

धार्मिक संगठनों में बंपर वृद्धि: 3 गुना से भी अधिक उछाल

एक साल के भीतर धार्मिक संगठनों में सबसे अधिक विस्तार दर्ज किया गया है। वर्ष 2024 में जहां ऐसी 2250 संस्थाएँ पंजीकृत थीं, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या 6363 हो गई।

यह वृद्धि बताती है कि UP में लोग बड़े पैमाने पर धार्मिक आयोजनों, मंदिर निर्माण, धार्मिक शिक्षा, और सामाजिक-आध्यात्मिक सेवा से जुड़ रहे हैं।

जिन क्षेत्रों में धार्मिक संगठन तेजी से बढ़े हैं, उनमें ग्रामीण और शहरी दोनों इलाके शामिल हैं। इससे यह भी संकेत मिलता है कि धार्मिक और पारंपरिक गतिविधियों में समाज की भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है।

समाजसेवा के संगठन भी बढ़े — 67,029 से पहुँचे 69,469

धार्मिक संगठनों के बाद सबसे अधिक विस्तार समाजसेवा से जुड़े ट्रस्ट और सोसाइटीज़ में हुआ है। पिछले वर्ष 67,029 पंजीकृत संस्थाओं की संख्या इस साल बढ़कर 69,469 तक पहुँची।

इनमें गरीबों की सहायता, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली संस्थाएं शामिल हैं।

शिक्षा क्षेत्र में ढाई गुना बढ़ोतरी – नई संस्थाओं की बाढ़

UP के शिक्षा क्षेत्र से जुड़े ट्रस्ट और सोसाइटीज़ भी तेजी से विकसित हुए हैं।
शिक्षा से जुड़ी संस्थाएँ 694 से बढ़कर 1848 हो गईं — यानी लगभग ढाई गुना वृद्धि।

यह आँकड़ा दर्शाता है कि प्रदेश में नए स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और शिक्षा सेवा ट्रस्ट तेज़ी से खुल रहे हैं।

अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन में भी बड़ा इजाफा

अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन की संख्या 594 से बढ़कर 1148 हो गई है।
अधिकारियों के अनुसार, यह सीधे-सीधे संकेत है कि प्रदेश में नई हाउसिंग सोसाइटी, अपार्टमेंट और फ्लैट कल्चर तेजी से फैल रहा है और लोग संगठित ढंग से अपने निवास प्रबंधन को प्राथमिकता दे रहे हैं।

खेल, कला और अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ी गतिविधियाँ

खेल संगठन: 255 से बढ़कर 575
पर्यावरण संगठन: 354 से बढ़कर 453
कला-साहित्य संस्थाएं: 845 से घटकर 266 (यह एकमात्र श्रेणी है जिसमें कमी दिखी है)
क्लब: 182 से बढ़कर 213
मंगल दल: 115 से बढ़कर 119
स्वास्थ्य संस्थाएं: 91 से बढ़कर 113

इन आँकड़ों से पता चलता है कि खेल और पर्यावरण क्षेत्रों में लोगों की भागीदारी बढ़ रही है, हालांकि कला-साहित्य से जुड़े संगठनों में गिरावट चिंता का विषय है।

ऑनलाइन पंजीकरण ने बढ़ाई रफ्तार

सरकार ने सोसाइटी और ट्रस्ट पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी है।
इसके बाद छोटे जिलों से भी बड़ी संख्या में संगठनों ने पंजीकरण कराया।

ई-ऑफिस प्रणाली
ऑनलाइन फीडबैक
स्टार रेटिंग सिस्टम
बिना दौड़-भाग के आसान रजिस्ट्रेशन
इन सबने UP में संगठन पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बना दिया है।

किस अधिनियम के तहत होता है पंजीकरण?

UP में सभी संस्थाएँ निम्न कानूनों के तहत पंजीकृत होती हैं—
सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860
भारतीय भागीदारी अधिनियम 1932
चिट फंड अधिनियम 1982

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