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Uttarpradesh :- वाहनों की प्रदूषण जांच में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ही आएगा OTP, बिना PUC 10 हजार का चालान

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Uttarpradesh :- लखनऊ से नई व्यवस्था लागू; चार करोड़ 80 लाख वाहन स्वामियों पर असर, मोबाइल नंबर अपडेट किए बिना नहीं होगी प्रदूषण जांच

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ए.के दूबे, लखनऊ से विशेष रिपोर्ट

Uttarpradesh:- प्रदेश में वाहनों की प्रदूषण जांच (PUC) व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब वाहन स्वामी के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ही ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) भेजा जाएगा। बिना ओटीपी सत्यापन के प्रदूषण जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी।

परिवहन विभाग की ओर से लागू की गई नई व्यवस्था के तहत वही मोबाइल नंबर मान्य होगा, जो वाहन खरीदते समय पंजीकरण के दौरान दर्ज कराया गया था। यदि वह नंबर बदल चुका है या खो गया है, तो पहले उसे अपडेट कराना अनिवार्य होगा।

बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) के वाहन चलाते पाए जाने पर 10 हजार रुपये तक का चालान किया जाएगा।

Uttarpradesh में चार करोड़ 80 लाख वाहन होंगे प्रभावित

प्रदेशभर में इस समय चार करोड़ 80 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों को छोड़कर सभी पेट्रोल, डीजल और सीएनजी वाहनों के लिए प्रदूषण जांच अनिवार्य है।

अब तक प्रदूषण जांच के दौरान कोई भी मोबाइल नंबर देकर ओटीपी मंगाया जा सकता था। कई मामलों में जांच केंद्र संचालक अपने मोबाइल नंबर का उपयोग कर प्रक्रिया पूरी कर देते थे। इससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे थे। नई व्यवस्था के बाद यह संभावना समाप्त हो जाएगी।

क्यों जरूरी किया गया पंजीकृत मोबाइल नंबर?

परिवहन विभाग के अनुसार बड़ी संख्या में ई-चालान लंबित पाए गए, क्योंकि वाहन स्वामियों तक चालान की सूचना पहुंच ही नहीं पाती थी।

समीक्षा में सामने आया कि 2024-25 में प्रदेशभर में 27 लाख 1 हजार 786 ई-चालान हुए, जिनमें से 22 लाख 11 हजार 244 चालान लंबित मिले। यह कुल चालानों का 81.8 प्रतिशत है।

चार पहिया वाहनों में 53.9%, दो पहिया में 43.3% और तीन पहिया में 6% चालान लंबित पाए गए।
मुख्य कारण यही था कि पंजीकृत मोबाइल नंबर सही नहीं था या अपडेट नहीं किया गया था।

परिवहन विभाग का क्या कहना है?

परिवहन मुख्यालय के आरटीओ कमल जोशी ने बताया कि पंजीकृत मोबाइल नंबर की व्यवस्था लागू कर दी गई है। इससे विभाग और वाहन स्वामी दोनों को लाभ होगा।

अब वाहन स्वामियों को समय से पहले प्रदूषण जांच की सूचना मिलेगी। साथ ही, यदि कोई चालान होता है तो उसकी जानकारी सीधे पंजीकृत नंबर पर पहुंच जाएगी।

किस वाहन की कितनी अवधि तक मान्य है प्रदूषण जांच?

BS-6 वाहन (2020 के बाद खरीदे गए) – 1 वर्ष तक मान्य
BS-4 वाहन (2014-2020 के बीच खरीदे गए) – 1 वर्ष तक मान्य
BS-3 और उससे पुराने वाहन (2014 से पहले) – 6 माह तक मान्य
निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद वाहन स्वामी को अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र पर जांच करानी अनिवार्य होगी।

प्रदूषण जांच की फीस कितनी?

दोपहिया पेट्रोल वाहन – ₹70
चार पहिया पेट्रोल/सीएनजी वाहन – ₹90
डीजल वाहन – ₹120
निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की शिकायत पर कार्रवाई की जाएगी।

बिना PUC के कितना चालान?

यदि वाहन प्रदूषण जांच के बिना सड़क पर चलते पाया गया तो 10,000 रुपये तक का चालान किया जा सकता है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद जांच प्रक्रिया अधिक सख्त हो जाएगी, क्योंकि अब किसी अन्य मोबाइल नंबर के जरिए प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकेगी।

मोबाइल नंबर अपडेट कैसे करें?

यदि वाहन स्वामी का पुराना मोबाइल नंबर बदल गया है, तो उसे तुरंत अपडेट कराना आवश्यक है। इसके लिए निम्न प्रक्रिया अपनाई जा सकती है:
ऑनलाइन प्रक्रिया:
1 . parivahan.gov.in वेबसाइट पर जाएं
2 . “Online Services” > “Vehicle Related Services” पर क्लिक करें
3 . अपना राज्य और संबंधित RTO/जिला चुनें
“Update Mobile Number” या “Miscellaneous” विकल्प पर क्लिक करें
4 . वाहन नंबर, चेसिस नंबर और इंजन नंबर के अंतिम पांच अंक दर्ज करें
5 . आधार ओटीपी के जरिए सत्यापन करें
6 . नया मोबाइल नंबर दर्ज कर सबमिट करें

ऑफलाइन प्रक्रिया:

यदि ऑनलाइन प्रक्रिया में असुविधा हो तो संबंधित एआरटीओ कार्यालय में आवेदन पत्र देकर मोबाइल नंबर अपडेट कराया जा सकता है।

पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर कदम

नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल ओटीपी सत्यापन सख्त करना नहीं है, बल्कि वाहन स्वामियों को परिवहन विभाग से जुड़ी हर सूचना सीधे पहुंचाना भी है।

इससे प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी और फर्जी जांच या तकनीकी खामियों की संभावना कम होगी।

वाहन स्वामियों के लिए चेतावनी

यदि आपका पंजीकृत मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है, तो जल्द से जल्द उसे ठीक कर लें। अन्यथा न तो प्रदूषण जांच हो सकेगी और न ही समय पर सूचना मिल पाएगी।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

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