Uttarpradesh :- बिजली चोरी और बकाया वसूली को लेकर शुरू हुआ विवाद, डुंडूखेड़ा गांव में कई दिनों से अंधेरा; वीडियो चार-पांच दिन पुराना बताया जा रहा
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ए.के दूबे
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं भाजपा नेता मनीष चौहान का एक वीडियो मंगलवार देर शाम इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होते ही चर्चा का विषय बन गया। वायरल वीडियो में वह ऊर्जा निगम के जूनियर इंजीनियर (जेई) सत्यप्रकाश से मोबाइल फोन पर बातचीत करते नजर आ रहे हैं। बातचीत के दौरान उनका लहजा उग्र हो जाता है और कथित तौर पर वह बिजलीघर में आग लगाने जैसी बात कहते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में उनके आसपास बड़ी संख्या में लोग खड़े दिखाई दे रहे हैं और मोबाइल स्पीकर पर बातचीत चल रही है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
जानकारी के अनुसार कांधला क्षेत्र के गांव डुंडूखेड़ा में कुछ दिन पहले ऊर्जा निगम की टीम बिजली चोरी और बकाया बिल वसूली के अभियान के तहत पहुंची थी। टीम का नेतृत्व जेई सत्यप्रकाश कर रहे थे। इसी दौरान गांव के एक मोहल्ले में बकाया बिल को लेकर विद्युत कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच कहासुनी हो गई।
विद्युत विभाग के कर्मचारियों का आरोप है कि ग्रामीणों ने उनके साथ गाली-गलौज की और उन्हें वहां से भगा दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने कई घरों के केबल उतार दिए। परिणामस्वरूप उस क्षेत्र के कई घरों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई और गांव में अंधेरा छा गया।
ग्रामीणों की नाराजगी और शिकायत
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार अनुरोध के बावजूद बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई। उनका कहना है कि जो भी लाइनमैन गांव में तार जोड़ने के लिए आता था, उसे जेई द्वारा वापस बुला लिया जाता था।
इसी बात को लेकर ग्रामीणों ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं भाजपा नेता मनीष चौहान से संपर्क कर शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद मनीष चौहान गांव पहुंचे और मामले को लेकर जेई से फोन पर बातचीत की।
फोन पर तीखी नोकझोंक, वीडियो हुआ वायरल
गांव में मौजूद लोगों के बीच स्पीकर फोन पर जेई और मनीष चौहान के बीच बातचीत शुरू हुई। वीडियो में सुनाई दे रहा है कि बातचीत के दौरान मनीष चौहान का स्वर तेज हो जाता है। वह कथित तौर पर कहते हैं, “मुझसे बहस करोगे, मुझे चैलेंज करोगे?” इसके बाद वह बिजलीघर में आग लगाने की बात कहते हुए सुनाई देते हैं।
वीडियो में दूसरी ओर से आवाज आती है—“आपका ही बिजलीघर है, आग लगा दो।” यह पूरा संवाद स्पीकर पर चल रहा था और आसपास खड़े लोगों में से किसी ने इसका वीडियो बना लिया।
वीडियो चार-पांच दिन पुराना, सोशल मीडिया पर अब आया
बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो चार-पांच दिन पुराना है, लेकिन मंगलवार देर शाम यह इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ।
वीडियो के सामने आते ही राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता और पूरी परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
जेई और नेता की प्रतिक्रिया
इस मामले में जेई सत्यप्रकाश ने बताया कि उन्हें वायरल वीडियो की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि डुंडूखेड़ा के कई ग्रामीणों के खिलाफ उन्होंने पहले ही थाने में तहरीर दी थी, लेकिन अब तक कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।
वहीं भाजपा नेता मनीष चौहान से संपर्क करने का प्रयास किया गया। उन्हें दो बार फोन किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। इसके बाद वाट्सएप पर संदेश भेजा गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला।
प्रशासनिक और राजनीतिक असर
वीडियो के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि वीडियो में कही गई बातें सही पाई जाती हैं तो यह एक जनप्रतिनिधि के आचरण और सार्वजनिक बयानबाजी को लेकर गंभीर मामला हो सकता है।
दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि वे कई दिनों से बिजली के अभाव में परेशान हैं और उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था, जिसके चलते मामला तूल पकड़ गया।
जांच की जरूरत
फिलहाल इस मामले में कोई औपचारिक जांच या कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। लेकिन वायरल वीडियो ने प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि ऊर्जा निगम, जिला प्रशासन या पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
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