Breaking News

UP Breaking News :- खजाना, खौफ और सर्प का पहरा! क्यों शाम ढलते ही सूना हो जाता है यह शिव मंदिर?

Spread the love

UP News :- महाशिवरात्रि पर सजे शिवालयों के बीच बलिया का यह प्राचीन मंदिर बना चर्चा का केंद्र, खजाने, आम के पेड़ और डरावने कुएं की लोककथाएं

देश दुनिया के ब्रेकिंग न्यूज और बाकी सभी अपडेट के लिए www.TheBoltaBharat.com का Whatsapp चैनल नीचे को  दिये गये लिंक को टैप/क्लिक करके जुड़ सकते हैं-Follow On Whatsapp

ए.के दूबे, बलिया

एक ओर जहां महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर जिले के शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर जनपद में स्थित एक ऐसा शिव मंदिर भी है, जहां लोग पूजा करने तो दूर, शाम ढलने के बाद जाने से भी कतराते हैं। यह मंदिर स्थानीय लोगों के बीच “मुड़ी कटवा शिवाला” के नाम से प्रसिद्ध है।

यह प्राचीन शिव मंदिर बलिया के ग्रामीण अंचल में स्थित है और वर्षों से रहस्यमयी कहानियों और लोकमान्यताओं का केंद्र बना हुआ है। यहां खजाना होने, अजीब आवाजें आने, आम का फल कभी न पकने और सांपों की रखवाली जैसी कथाएं पीढ़ियों से सुनाई जाती रही हैं।

कैसे पड़ा ‘मुड़ी कटवा’ नाम?

स्थानीय निवासी राहुल कुमार शर्मा (जगदीशपुर कला) बताते हैं कि बुजुर्गों के अनुसार यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है। मान्यता है कि बहुत समय पहले यहां एक पुजारी अपने परिवार के साथ रहता था। एक दिन किसी पारिवारिक घटना के बाद अचानक तेज बिजली कड़की और मंदिर का ऊपरी हिस्सा (शिखर) क्षतिग्रस्त हो गया।

इसके बाद से इस मंदिर को “मुड़ी कटवा शिवाला” कहा जाने लगा।
हालांकि इन कथाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन गांव में आज भी यह नाम प्रचलित है। मंदिर के आसपास खेत हैं और दिन में किसान यहां काम करने आते हैं, लेकिन रात होते ही इलाका सूना हो जाता है।

up ka aitihasik ped
up ka aitihasik ped

आम का पेड़ जो कभी फल नहीं पकने देता

मंदिर परिसर में एक पुराना आम का पेड़ है, जो इस स्थान को और भी रहस्यमयी बनाता है। स्थानीय निवासी अमन सिंह बताते हैं कि इस पेड़ पर हर साल बड़े-बड़े आम लगते हैं, लेकिन वे कभी पकते नहीं। कच्ची अवस्था में ही सड़ जाते हैं।

लोगों का मानना है कि यह कोई अलौकिक प्रभाव है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह मिट्टी, जलवायु या किसी रोग का परिणाम भी हो सकता है। बावजूद इसके, स्थानीय लोगों के बीच यह पेड़ एक रहस्य बना हुआ है।

up-ka-aitihasik-kuwa
up-ka-aitihasik-kuwa

डरावना कुआं और अजीब आवाजें

मंदिर के सामने एक पुराना कुआं भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि रात 12 बजे के बाद वहां से अजीबोगरीब आवाजें सुनाई देती हैं। पप्पू विश्वकर्मा बताते हैं कि गांव के लोग इस कुएं का पानी नहीं पीते।

कुछ लोग कहते हैं कि कुएं में जहरीले जीव रहते हैं और रात में वहां जाना खतरनाक हो सकता है। कई बार पशुओं के गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे डर और बढ़ गया है।

खजाने की कथा और ‘बिना पूंछ’ वाला सांप

स्थानीय लोककथाओं के अनुसार मंदिर के नीचे सात सोने के कलश दबे हैं, जो हर रात पास की टोंस नदी में स्नान कर वापस लौट आते हैं। हालांकि इस दावे की कोई पुष्टि नहीं है।
जितेंद्र कुमार शर्मा बताते हैं कि यहां एक लगभग 200 साल पुराना बिना पूंछ वाला सांप भी रहता है, जो इस खजाने की रखवाली करता है।

कुछ वर्ष पहले राजस्थान से आए लोगों ने यहां खुदाई करने की कोशिश की थी, लेकिन कथित तौर पर खुदाई के दौरान बड़ी संख्या में सांप निकलने के कारण वे लोग वापस लौट गए। प्रशासनिक रिकॉर्ड में ऐसी किसी खुदाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

नागा साधु और बढ़ता रहस्य

करीब दो साल पहले यहां एक नागा साधु आए थे, जिन्होंने एक महीने तक अखंड कीर्तन कराया और मंदिर के टूटे हिस्से की मरम्मत भी करवाई। भव्य कलश यात्रा भी निकाली गई।

लेकिन बाद में गांव में अफवाहें फैलने लगीं कि वह साधु औघड़ हैं और उनकी गतिविधियां संदिग्ध हैं। कुछ लोगों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। इन अफवाहों के बाद साधु अचानक वहां से चले गए।
इन घटनाओं ने मंदिर के रहस्य को और गहरा कर दिया।

शाम होते ही बंद हो जाता है रास्ता

मंदिर के आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि सूर्यास्त के बाद यहां कोई नहीं आता। खेतों में काम करने वाले किसान भी शाम ढलने से पहले लौट जाते हैं।
लोगों का कहना है कि रात में अजीब आवाजें और जहरीले जीवों की हलचल से डर का माहौल बना रहता है।

प्रशासन और वैज्ञानिक नजरिया

इन तमाम दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। स्थानीय प्रशासन ने कभी भी मंदिर परिसर में खजाना, अलौकिक घटनाएं या किसी विशेष खतरे की पुष्टि नहीं की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लोककथाएं ग्रामीण समाज में पीढ़ियों से चलती आ रही हैं और समय के साथ उनमें रहस्य और रोमांच जुड़ता चला जाता है।

आम के पेड़ का फल न पकना किसी रोग, कीट या मिट्टी की गुणवत्ता का परिणाम हो सकता है। कुएं से आवाजें आना जल स्तर, हवा के दबाव या जीव-जंतुओं की गतिविधियों से जुड़ा हो सकता है।

आस्था बनाम अंधविश्वास

महाशिवरात्रि जैसे पावन अवसर पर जहां एक ओर श्रद्धालु भोलेनाथ की पूजा में लीन हैं, वहीं “मुड़ी कटवा शिवाला” जैसी जगहें आस्था और अंधविश्वास के बीच खड़ी नजर आती हैं।

कुछ लोग इसे शिव की दिव्य शक्ति मानते हैं, तो कुछ इसे लोककथाओं और प्राकृतिक कारणों का परिणाम बताते हैं।
फिलहाल यह मंदिर बलिया में जिज्ञासा, डर और रहस्य का केंद्र बना हुआ है।

Contact Us

Whatsapp

Follow

X/Twiter

Follow

Facebook

Follow

Instagram

Follow

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *