डॉक्टर की गैरमौजूदगी में ऑपरेशन, दो बच्चियों की मौत — बलिया का अपूर्वा हॉस्पिटल फिर सवालों के घेरे में!, सीएमओ बोले मामला संज्ञान में नही है….

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बलिया। जनपद के चर्चित अपूर्वा हॉस्पिटल पर फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सीनियर गायनोकॉलॉजिस्ट डॉ. ज्योत्स्ना सिंह और एक अन्य चिकित्सक पर लापरवाही, गुमराह करने और इलाज में गंभीर चूक के आरोप लगे हैं, जिसके चलते जुड़वां नवजात बेटियों की मौत हो गई।

सिंगही निवासी रंजना राय अपनी भाभी (मृत बच्चियों की माँ) के इलाज के लिए बीते तीन दिनों से अपूर्वा हॉस्पिटल, बलिया का चक्कर काट रही थीं। लेकिन हॉस्पिटल में मौजूद डॉक्टर और स्टाफ इलाज करने के बजाय टालमटोल करते रहे।

उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को जब मरीज को पहली बार जांच के लिए लाया गया, तब मौजूद डॉक्टर ने सुई लगाई, जिसके बाद से पेट में पल रहे बच्चों की हरकतें धीमी पड़ गईं।

मंगलवार की रात को जब मरीज को तेज दर्द हुआ, तब परिजन फिर अपूर्वा हॉस्पिटल पहुंचे।
काफी दबाव बनाने के बाद ही अस्पताल ने महिला को भर्ती किया, जिसके बाद देर रात सीजर ऑपरेशन किया गया।

ऑपरेशन के दौरान दो बेटियाँ मृत पैदा हुईं।
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर में डॉ. ज्योत्स्ना सिंह मौजूद नहीं थीं, और उनके स्टाफ ने ही सीजर किया।
परिजनों ने यह भी कहा कि दो डॉक्टरों की लापरवाही और गलत निर्णयों की वजह से दोनों बच्चियों की जान गई।

हॉस्पिटल रोड स्थित अपूर्वा हॉस्पिटल के बाहर मौजूद परिजन व लोग

घटना के बाद नर्सिंग होम परिसर में जमकर हंगामा हुआ।
परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल के कुछ स्टाफ ने बदतमीजी की और समझौते का दबाव बनाया।
सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को संभाला।

स्थानीय लोगों ने कहा कि अपूर्वा हॉस्पिटल पहले भी विवादों में रह चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
जनपदवासी सवाल उठा रहे हैं —
कब रुकेगी प्राइवेट हॉस्पिटलों की लापरवाही? और क्या स्वास्थ्य विभाग अब कोई ठोस कदम उठाएगा?

सीएमओ बोले — “मामला संज्ञान में नहीं है”

जुड़वां बच्चियों की मौत जैसे गंभीर मामले पर जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) बलिया डॉ. संजीव वर्मन से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि,“यह मामला अभी संज्ञान में नहीं है।”

सीएमओ का यह बयान सवाल खड़े करता है कि
जब दो मासूमों की मौत अस्पताल में होती है, परिजन हंगामा करते हैं, पुलिस पहुंचती है — तो स्वास्थ्य विभाग तक खबर क्यों नहीं पहुंचती?

स्थानीय लोगों का कहना है कि

अगर इतनी बड़ी घटनाएं भी अधिकारियों के “संज्ञान” में नहीं आतीं, तो फिर आम मरीजों की शिकायतें कहां जाएंगी?

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