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सरकारी स्कूल में 6वीं के छात्र का यौन शोषण, चार नाबालिग आरोपी पकड़े गए — तीन महीने से चला रहा था खौफनाक खेल

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दिल्ली के रोहिणी इलाके से एक शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जिसने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रोहिणी के अमन विहार थाना क्षेत्र स्थित एक सरकारी विद्यालय में चार सीनियर छात्रों द्वारा कक्षा 6 के एक नाबालिग छात्र का तीन महीने तक यौन शोषण किए जाने का मामला उजागर हुआ है।

पीड़ित छात्र को आरोपियों ने टॉयलेट में ले जाकर न सिर्फ गलत हरकतें कीं, बल्कि मारपीट, वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी और चाकू दिखाकर चुप रहने का दबाव भी बनाया।

पुलिस ने चारों नाबालिग आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और उन्हें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश किया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है, जबकि स्कूल प्रबंधन पर भी सवाल उठने लगे हैं कि इतना बड़ा मामला महीनों तक कैसे दबा रहा।

कैसे खुला मामला?

यह शर्मनाक प्रकरण उस समय उजागर हुआ, जब मुख्य आरोपी छात्र ने खुद ही एक टीचर के साथ इस वारदात का वीडियो साझा कर दिया। वीडियो देखने के बाद शिक्षक दंग रह गए और तुरंत इसे स्कूल के प्रधानाचार्य के संज्ञान में लाया। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने पीड़ित छात्र के परिवार को बुलाकर पूरी बात बताई और मामला पुलिस तक पहुंचाया गया।

बहादुरी दिखाते हुए 12 वर्षीय पीड़ित छात्र ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने बार-बार उसके साथ टॉयलेट में गलत हरकतें कीं। विरोध करने पर आरोपियों ने उसे पीटा और चाकू दिखाकर धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया तो जान से मार देंगे। डर के कारण वह किसी से कुछ नहीं कह पाया।

आरोपी कौन हैं?

जांच में सामने आया कि आरोपियों में—
एक 11वीं कक्षा का छात्र,
दो 8वीं कक्षा के छात्र,
और एक 7वीं कक्षा का छात्र

शामिल हैं। सभी की उम्र 14 से 15 वर्ष के बीच है। चौंकाने वाली बात यह है कि कथित सीनियर छात्रों ने पीड़ित के वीडियो भी बनाए और उसे दोस्तों में शेयर किया।

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी के माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं, जबकि बाकी आरोपी भी साधारण परिवारों से आते हैं।

पीड़ित बच्चा महीनों तक चुप क्यों रहा?

पीड़ित छात्र ने बताया कि वह डर के कारण किसी को कुछ नहीं बता सका। वह रोजाना स्कूल जाता था और आरोपी उसे देख धमकी देते थे।
उसने कहा—
“मुझे डर था कि ये मुझे मार देंगे। मैं बहुत परेशान था, लेकिन किसी से कह नहीं पा रहा था।”

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चे ऐसी स्थितियों में डर, शर्म और सामाजिक कलंक की आशंका से चुप हो जाते हैं। यह केस इसी बात का घोर उदाहरण है।

पुलिस की कार्रवाई

अमन विहार थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी चार नाबालिगों को पकड़ लिया। पुलिस ने:
मेडिकल परीक्षण कराया,
वीडियो बरामद किए,
घटना स्थल की जांच की,
और जेजे बोर्ड में सभी आरोपियों को पेश किया।
स्कूल प्रबंधन ने भी शिक्षा निदेशालय को रिपोर्ट भेज दी है।

बच्चों की सुरक्षा पर बड़े सवाल

यह घटना सिर्फ एक बच्चा या एक स्कूल ही नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
मुख्य सवाल ये हैं—

स्कूल के टॉयलेट क्षेत्रों में निगरानी क्यों नहीं थी?

बच्चों के व्यवहार में आए बदलाव को किसी ने क्यों नहीं नोट किया?

क्या मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर स्कूल पर्याप्त ध्यान दे रहे हैं?

विशेषज्ञों की मानें तो स्कूलों में “चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी” का होना अनिवार्य है, पर अधिकांश स्कूलों में यह सिर्फ कागजों तक सीमित है।

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