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नई दिल्ली: कभी टाटा, पेप्सी और जनरल इलेक्ट्रिक (GE) जैसी कंपनियों में शानदार करियर वाले दीपक सभरवाल ने जब 2017 में 20 साल का कॉरपोरेट सफर छोड़कर खेती करने का फैसला किया, तो उनके कई साथी हैरान रह गए। MBA ग्रेजुएट दीपक ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन और बोर्डरूम मीटिंग्स को अलविदा कहकर राजस्थान के पुष्कर की अरावली पहाड़ियों में ऑर्गेनिक खेती को अपनाया — और यही फैसला उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन गया।
आज दीपक ‘अर्थी टेल्स ऑर्गेनिक (Earthy Tales Organic)’ के संस्थापक और सीईओ हैं — एक ऐसी कंपनी जो केमिकल-फ्री खेती और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में देशभर में पहचान बना चुकी है। दिसंबर 2018 में शुरू हुई यह कंपनी अब करोड़ों का कारोबार कर रही है।
ज़मीन से जुड़ी कहानी: ‘जहर’ ने बदल दी सोच
2012 में GE में काम करते हुए दीपक का ध्यान पुष्कर स्थित अपनी जमीन की ओर गया। वह वीकेंड पर पत्नी सोनल के साथ 420 किमी दूर खेतों तक सफर करते थे। यह उनकी “वीकेंड फार्मिंग” थी, लेकिन धीरे-धीरे यही उनका असली पैशन बन गई।
एक दिन खेत पर उन्होंने कीटनाशक के डिब्बे पर लिखा शब्द “जहर” देखा। उसी पल उन्हें एहसास हुआ कि वो मिट्टी में ज़हर मिला रहे हैं — और यही ज़हर किसी के भोजन में पहुंच रहा है। उसी दौरान उनकी मां को कैंसर हो गया। इस दोहरे झटके ने दीपक को भीतर से हिला दिया और उन्होंने तय किया कि वे स्वस्थ भोजन और सुरक्षित मिट्टी के लिए काम करेंगे।
कॉरपोरेट से किसान तक: एक नया मिशन
दीपक ने 2018 में Earthy Tales Organic की नींव रखी और कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट अभिषेक सिंघल को बतौर को-फाउंडर जोड़ा। आज यह कंपनी न केवल पुष्कर में मोरिंगा, आंवला और नींबू जैसी फसलें उगाती है, बल्कि राजस्थान और हिमाचल के 300+ किसानों के साथ मिलकर काम करती है।
कंपनी किसानों को मंडी रेट से 15-20% ज्यादा प्रीमियम देती है, जिससे वे रासायनिक खेती छोड़ जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
करोड़ों में कारोबार, सैकड़ों प्रोडक्ट्स
वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का रेवेन्यू ₹4.44 करोड़ पहुंच चुका है और इस साल का लक्ष्य ₹7-8 करोड़ है। उनके पोर्टफोलियो में 135 से अधिक प्रोडक्ट्स हैं — फल-सब्ज़ियों से लेकर दालें, तेल, बाजरा और बेकरी आइटम तक।
जैविक उत्पादों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कंपनी के पास NPOP सर्टिफिकेशन है और हर दो-तीन महीने में रेगुलर क्वालिटी टेस्ट कराए जाते हैं, जिनके नतीजे पब्लिक के साथ साझा किए जाते हैं।
अब तक कंपनी 200 टन केमिकल्स के इस्तेमाल से बचने का दावा कर चुकी है।
महिलाओं की अगुवाई वाला ‘कम्युनिटी वेलनेस चैंपियन’ प्रोग्राम
ग्राहकों को स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए दीपक ने CWC (Community Wellness Champion) प्रोग्राम शुरू किया है, जिसका नेतृत्व महिला कर्मचारी करती हैं।
‘बुद्धा फेलोशिप’ से सम्मानित
दीपक सभरवाल को उनके सामाजिक उद्यमिता मिशन के लिए बुद्धा फेलोशिप 2024-26 से भी सम्मानित किया गया है, जो उनके विज़न को फंडिंग और एक्सपर्ट सपोर्ट प्रदान करती है।
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