कोविड ड्यूटी कर रहे चिकित्सक के पक्ष में कड़ा फैसला, हरियाणा सरकार पर ₹50,000 का जुर्माना
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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कोविड ड्यूटी पर तैनात एक सरकारी चिकित्सक के खिलाफ केवल इसलिए की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर कड़ी नाराज़गी जताई है, क्योंकि वह अस्पताल निरीक्षण के दौरान विधायक के आने पर खड़ा नहीं हुआ था।
न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने इस कार्रवाई को राज्य का “अत्यंत असंवेदनशील और चिंताजनक रवैया’’ बताते हुए इसकी निंदा की। अदालत ने कहा कि समर्पित चिकित्सकों का सम्मान होना चाहिए, न कि अपमान।
याचिकाकर्ता डॉ. मनोज कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर थे। उनकी याचिका के मुताबिक, एक दिन अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे विधायक इस बात पर नाराज़ हो गए कि डॉक्टर उनके सामने खड़े नहीं हुए। इसके बाद सरकार ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कार्रवाई का प्रस्ताव रखा।
डॉ. मनोज ने कहा कि वह विधायक को पहचान नहीं पाए थे, और उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। अदालत ने भी इसे एक “अतार्किक और व्यथित करने वाली कार्रवाई” करार दिया।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
पीठ ने कहा:
> “किसी डॉक्टर से यह अपेक्षा करना कि वह इमरजेंसी वार्ड में विधायक के लिए खड़ा हो, और न करने पर दंडित किया जाए—यह राज्य की असंवेदनशीलता और चिकित्सकों के प्रति अनादर को दर्शाता है।”
अदालत ने यह भी कहा कि डॉक्टर को एनओसी न देकर उसकी उच्च शिक्षा का रास्ता रोकना “पूरी तरह मनमाना और अनुचित” है।
कोर्ट का आदेश
डॉक्टर को तुरंत एनओसी जारी की जाए। राज्य सरकार को ₹50,000 का जुर्माना PGIMER, चंडीगढ़ के गरीब मरीज कल्याण कोष में जमा करना होगा। अदालत ने कहा कि चिकित्सकों के साथ परिजन या जनप्रतिनिधि द्वारा होने वाला दुर्व्यवहार अब बंद होना चाहिए और ऐसे मामलों पर कड़ी रोक जरूरी है।
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