जिला अस्पताल में जनरल सर्जन बना ‘नाक-कान-गला विशेषज्ञ’, मरीजों से वसूली का आरोप

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बलिया। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार, अस्पताल में तैनात एक जनरल सर्जन चिकित्सक नाक, कान और गला (ईएनटी) विशेषज्ञ के रूप में ओपीडी में बैठकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इस पर मरीजों ने महंगी दवाइयाँ लिखने और अनावश्यक उपचार के आरोप लगाए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, जिला अस्पताल की ओपीडी संख्या 17 पर तैनात डॉ. दानिश को जनरल सर्जन के पद पर नियुक्त किया गया है, लेकिन वे ओपीडी में ईएनटी विशेषज्ञ के रूप में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विभागीय नियमों का उल्लंघन है, और इससे मरीजों के साथ आर्थिक शोषण हो रहा है।

मरीजों का आरोप – इलाज नहीं, महँगी दवाइयाँ

नेहा देवी (58), निवासी बांसडीह ने बताया कि “मेरे कान से मवाद गिर रहा था। ओपीडी नंबर 17 में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने 1800 रुपये की दवा और इंजेक्शन लिख दिए। दवा लेने के बाद भी आराम नहीं हुआ। बाद में प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराया तो ठीक हुई।”

रोशन कुमार, निवासी तिखमपुर ने बताया कि उनकी बहन के कान में दर्द था। डॉक्टर ने 600 रुपये की दवाइयाँ लिखीं, लेकिन कोई खास असर नहीं हुआ।

राजिता मिश्र, निवासी चितबड़ागांव ने बताया कि कान में झनझनाहट की समस्या पर डॉक्टर ने 900 रुपये की दवा लिखी।

सूरज, निवासी राजपुर ने बताया कि गले में दर्द की शिकायत पर डॉक्टर ने 800 रुपये की दवा लिखी।

मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त या सस्ती चिकित्सा सुविधा मिलने की उम्मीद लेकर आने वाले लोग यहाँ महँगी दवाइयों और इंजेक्शनों के बोझ तले दब जाते हैं।

अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ा असंतोष

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को मामले की जानकारी है, फिर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि मामला अंदरूनी मिलीभगत का परिणाम है।

लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में मरीजों के साथ ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।

सीएमएस का बयान

इस पूरे मामले पर पूछे जाने पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. एस.के. यादव ने बताया — चिकित्सक की कमी होने के कारण इनको ईएनटी ओपीडी में बैठने का आदेश दिया गया है, साथ ही बाहर का दवाई लिखना वर्जित है।
“अभी तक इस संबंध में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। यदि शिकायत मिलती है तो निश्चित रूप से जांच कर कार्रवाई की जाएगी।”

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