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जमुना दयाल, वाराणसी
किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी ने एक अहम कदम उठाया है। संस्थान ने अपनी लोकप्रिय भिंडी की किस्म ‘काशी सहिष्णु’ के बड़े पैमाने पर विस्तार और उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन के लिए बिहार की अशोका एजीटेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी को मजबूत करेगा ताकि किसानों को जल्द से जल्द पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण बीज मिल सकें। अशोका एजीटेक, जो बीज उत्पादन और वितरण में एक प्रमुख कंपनी है, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से सक्रिय है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईआईवीआर के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीजों का वितरण तभी संभव है जब सार्वजनिक और निजी संस्थान मिलकर काम करें। उन्होंने निजी कंपनियों से आह्वान किया कि वे उच्च गुणवत्ता, जैविक शुद्धता और उत्पादन क्षमता वाले बीज किसानों तक पहुंचाने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
आईआईवीआर के वैज्ञानिकों ने बताया कि किसानों में संस्थान द्वारा विकसित सब्जी प्रजातियों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे बीज कंपनियां भी इन प्रजातियों में रुचि दिखा रही हैं।
किसानों को सीधा लाभ:
कंपनी के संस्थापक निदेशक मुकुंद कुमार, जो बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के पूर्व छात्र हैं, ने बताया कि इस एमओयू के तहत किसानों को ‘काशी सहिष्णु’ भिंडी के बीज कम दाम पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे किसानों की बीज लागत लगभग आधी हो जाएगी।
इस अवसर पर संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह, डॉ. सुदर्शन मौर्य, भिंडी प्रजनक डॉ. प्रदीप करमाकर, तथा कंपनी की ओर से नूतन कुमार चौधरी और कृपानंद मिश्र उपस्थित रहे।
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