महलनुमा ‘झोपड़ी’ के सामने गड्ढे, नाले का पानी और कूड़े का अंबार
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ए.के दूबे, बलिया
देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की स्मृतियों से जुड़ी चंद्रशेखर नगर कॉलोनी आज बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन चुकी है। जिस कॉलोनी में चंद्रशेखर वर्षों तक रहे, आज उसी इलाके की मुख्य सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। सड़क पर नालियों का गंदा पानी बह रहा है, जगह-जगह गड्ढे हैं और कॉलोनी के भीतर कूड़े का ढेर लगा हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि इसी कॉलोनी में चंद्रशेखर का वह आवास स्थित है, जिसे लोग आज भी ‘झोपड़ी’ कहते हैं, जबकि वह वास्तव में एक महलनुमा भवन है। चंद्रशेखर के निधन के बाद अब इसी आवास में उनके पुत्र और राज्यसभा सांसद नीरज शेखर रहते हैं, लेकिन घर के बाहर की सड़क और बुनियादी सुविधाएं बदहाली की कहानी कह रही हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री के घर से 30 मीटर दूर बदहाल सड़क
स्थानीय लोगों के अनुसार जर्जर सड़क चंद्रशेखर के आवास से महज 30 मीटर की दूरी पर है। सड़क पर हर समय नाले का पानी बहता रहता है, जिससे पैदल चलना तो दूर, दोपहिया और चारपहिया वाहनों का निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। कई बार लोग गिरकर चोटिल हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
जनप्रतिनिधियों के घर इसी कॉलोनी में
चंद्रशेखर नगर नगरपालिका परिषद बलिया के अंतर्गत आता है। इसी कॉलोनी में सांसद नीरज शेखर, उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री नारद राय, पूर्व विधायक भोला पांडे, नगरपालिका अध्यक्ष संत कुमार गुप्ता ‘मिठाईलाल’ के आवास स्थित हैं। इसके बावजूद कॉलोनी की स्थिति बद से बदतर बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा
चंद्रशेखर नगर निवासी राहुल कुमार ने बताया,
“सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं, लेकिन किसी जिम्मेदार का ध्यान नहीं है।”
राहगीर गुलशन पांडेय ने कहा,“बाइक से गुजरते वक्त डर लगता है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए। जब जनप्रतिनिधियों की कॉलोनी का यह हाल है, तो आम इलाकों की स्थिति क्या होगी?”
स्थानीय निवासी प्रीति ने कहा, “यहां समस्याओं का अंबार है—नाले का पानी सड़क पर बहता है, कूड़ा डंप है। यहां रहना दूभर हो गया है। सांसद और पूर्व मंत्री के घर इसी कॉलोनी में हैं, फिर भी यह हाल है।”
वहीं विनीत तिवारी ने नाराजगी जताते हुए कहा, “घर से निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चों को स्कूल छोड़ना तक खतरे से खाली नहीं। जनप्रतिनिधियों के पास महंगी गाड़ियां हैं, कम से कम अपने मोहल्ले की सड़क तो दुरुस्त करा लेते।”
विकास के दावों पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जो लोग अपने मोहल्ले की सड़क और नालियों तक दुरुस्त नहीं करा पा रहे, वे पूरे जिले और प्रदेश के विकास की बात कैसे कर सकते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री की विरासत से जुड़ी कॉलोनी की यह स्थिति प्रशासन और जनप्रतिनिधियों दोनों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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