मां की मौत के बाद बेटे का दावा – इलाज में लापरवाही से हुआ लकवा, दस्तावेजों में हेराफेरी; जांच समिति गठित, रिपोर्ट का इंतजार
देश दुनिया के ब्रेकिंग न्यूज और बाकी सभी अपडेट के लिए www.TheBoltaBharat.com का Whatsapp चैनल नीचे को दिये गये लिंक को टैप/क्लिक करके जुड़ सकते हैं-Follow On Whatsapp
आशीष दूबे, बलिया
जनपद में एक निजी अस्पताल के खिलाफ गंभीर आरोपों का मामला सामने आया है। मिश्रा नेउरी (बलिया) निवासी कन्हैया मिश्रा ने ईसीएचएस पैनल में शामिल गौरव मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर गलत इलाज, मेडिकल दस्तावेजों में कथित जालसाजी और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को प्रेषित पत्र में जांच की अद्यतन स्थिति और की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
कन्हैया मिश्रा का आरोप है कि उनकी माता का इलाज उक्त अस्पताल में कराया गया, जहां गलत उपचार के कारण उन्हें लकवा मार गया। परिजनों का दावा है कि स्थिति लगातार बिगड़ती गई और अंततः 27 अक्टूबर 2025 को अत्यधिक पीड़ा के बीच उनकी मृत्यु हो गई। उनका कहना है कि इलाज के दौरान अस्पताल प्रशासन ने रिकॉर्ड में हेराफेरी की और एक ही इलाज से संबंधित तीन अलग-अलग दस्तावेज उपलब्ध कराए।
Ballia :- दस्तावेजों में हेराफेरी और धमकी का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने इलाज से संबंधित मूल दस्तावेजों की मांग की, तो उन्हें कथित रूप से धमकाया गया। उनका कहना है कि सरकारी भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरे इलाज की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और बाद में सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
कई बार दी शिकायत, जांच की स्थिति अस्पष्ट
कन्हैया मिश्रा के अनुसार, उन्होंने 23 अप्रैल 2025 को स्पीड पोस्ट के माध्यम से सीएमओ कार्यालय में लिखित शिकायत भेजी थी। इसके बाद 19 मई 2025 को अनुस्मारक, 24 मई 2025 को एक और आवेदन, 18 जून 2025 को पुनः अनुस्मारक तथा 5 दिसंबर 2025 को पुनः प्रार्थना पत्र दिया।
शिकायत के आधार पर सीएमओ कार्यालय द्वारा 5 जून 2025 को जांच समिति गठित की गई।
बाद में 15 अक्टूबर 2025 को दूसरी समिति का गठन किया गया। 1 नवंबर 2025 को शिकायतकर्ता को समिति के समक्ष उपस्थित होने के लिए बुलाया गया और 12 नवंबर 2025 को उन्होंने अपना लिखित बयान दर्ज कराया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि बयान के बाद उन्हें एक सप्ताह में अद्यतन जानकारी देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक उन्हें जांच रिपोर्ट या कार्रवाई की स्थिति से अवगत नहीं कराया गया है।
Ballia :- समय पर कार्रवाई न होने से सवाल
परिवार का कहना है कि यदि जांच में तेजी दिखाई जाती तो मामले की सच्चाई सामने आ सकती थी। उनका यह भी आरोप है कि जब मरीज जीवित थीं, तब उनका बयान भी दर्ज किया जा सकता था, जिससे जांच को मजबूती मिलती।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जांच रिपोर्ट शीघ्र सार्वजनिक की जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो अस्पताल के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाए।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला निजी अस्पतालों की जवाबदेही और चिकित्सा पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह केवल चिकित्सकीय लापरवाही ही नहीं, बल्कि मेडिकल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और मरीज के अधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला बन सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समयबद्ध और निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है, ताकि आम जनता का स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास कायम रहे।
न्याय की प्रतीक्षा में परिवार
फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल उनकी व्यक्तिगत पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में अन्य मरीजों की सुरक्षा से भी जुड़ी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि स्वास्थ्य विभाग जांच को अंतिम रूप देकर क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिलता है।
Contact Us |
|
|
|
|
|
X/Twiter |
|
|
|
|
|
|

