आंख की शिकायत लेकर पहुंचीं 71 वर्षीय महिला, सिर का एक्सरे और एलोपैथिक दवाएं लिखे जाने से उठा सवाल; सीएमएस बोले– शिकायत मिलेगी तो होगी जांच
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आशीष दूबे, बलिया
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज के दावे के बीच जिला अस्पताल के आयुष विभाग से जुड़ा एक मामला चर्चा में है। 71 वर्षीय सोनिया देवी आंख से पानी आने की शिकायत लेकर सोमवार को जिला अस्पताल पहुंचीं, लेकिन परिजनों का आरोप है कि वहां उन्हें अनावश्यक जांच और महंगी दवाओं की पर्ची थमा दी गई।

परिजनों के मुताबिक पर्ची काउंटर से उन्हें आयुष विभाग भेजा गया, जहां तैनात आयुष चिकित्सक डॉ. अफजाल अहमद ने आंख की समस्या के बावजूद सिर का एक्सरे लिख दिया। साथ ही करीब 1000 रुपये की एलोपैथिक दवाएं बाहर से खरीदने को कहा गया। मरीज पक्ष का दावा है कि लगभग 300 रुपये का एक्सरे और अन्य दवाओं का खर्च अलग से हुआ।

‘अनुमति के दायरे’ पर सवाल
मरीज पक्ष का आरोप है कि डॉ. अफजाल अहमद आयुष विभाग में फिजिशियन के रूप में तैनात हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सकों को विशेष श्रेणी के मामलों में एलोपैथिक दवाएं लिखने और विशिष्ट जांच कराने की अनुमति सीमित दायरे में होती है।
परिजनों का कहना है कि आंख और सिर से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ राय के बजाय सीधे महंगी जांच व एलोपैथिक दवाएं लिखी गईं, जो नियमों के विपरीत है।

आयुर्वेदिक दवाएं धूल फांकतीं, बाहर की दवा क्यों?
स्थानीय लोगों का कहना है कि आयुर्वेद विभाग में कई दवाएं खुले में पड़ी रहती हैं, लेकिन मरीजों को बाहर की दवा लिखी जाती है। आरोप है कि कमीशन के चक्कर में महंगी दवाएं लिखी जाती हैं, जबकि सरकारी दवाएं उपलब्ध रहती हैं।
मामले में सीएमएस डॉ. एस. के. यादव ने कहा कि यह मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है। लिखित शिकायत मिलने पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकारी अस्पतालों में मरीजों को वाकई मुफ्त और पारदर्शी इलाज मिल पा रहा है, या फिर कहीं न कहीं व्यवस्था में कमी बनी हुई है।
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