Ballia। जिले में बिजली विभाग की लापरवाही लगातार जानें ले रही है। मंगलवार को बांसडीह क्षेत्र के छोडहर गांव में गुलु राजभर (35) पुत्र शिवबचन राजभर की 11 हजार वोल्ट के जर्जर तार से करंट लगने से मौत हो गई। गुलु राजभर मूल रूप से सुखपुरा थाना क्षेत्र के करमपुर गांव का निवासी था। यह इस इलाके में 48 घंटे में तीसरी मौत है। इससे पहले सुखपुरा थाना क्षेत्र के जीरा बस्ती गांव में दो सगी बहनें करंट की चपेट में आकर जान गंवा चुकी हैं। तीन मौतों ने पूरे इलाके में गुस्सा और मातम दोनों फैला दिए हैं।
गुलु राजभर मंगलवार को छोडहर स्थित राम जानकी मंदिर के पास ईंट गिराने का काम कर रहा था। तभी ऊपर से लटका जर्जर 11 हजार वोल्ट का तार उसके संपर्क में आ गया। वह गंभीर रूप से झुलस गया। स्थानीय लोगों ने तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक गुलु राजभर ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता था। पीछे उसकी पत्नी, दो बेटे अनीश व बिपिन और बेटी रूबी है।
सुखपुरा थाना प्रभारी ने बताया कि मामला संज्ञान में है। परिजन शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल ले गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस तार की शिकायत पहले भी कई बार बिजली विभाग को की गई थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती तो यह हादसा टल सकता था।
इसी क्षेत्र के जीरा बस्ती गांव में सोमवार को दो सगी बहनों की करंट लगने से मौत हुई थी। स्कूल से लौटते समय दोनों बहनें पानी भरे गड्ढे से गुजर रही थीं, तभी उसमें गिरे बिजली के तार से वे चपेट में आ गईं। ग्रामीणों का कहना है कि गड्ढे में बिजली का तार कई दिनों से पड़ा था और इसकी जानकारी बिजली विभाग, SDM और DM तक दी गई थी, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग की लापरवाही अब जानलेवा साबित हो रही है। तीन मौतों के बाद गांवों में गुस्सा है। लोग कह रहे हैं कि जब तक दोषी अफसरों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह मौतों का सिलसिला जारी रहेगा।
हादसों की जानकारी पर DM, CDO और CMO मौके पर पहुंचे और जांच के आदेश दिए। DM बलिया ने कहा कि “यह बेहद दुखद घटना है, लापरवाही जिस स्तर पर हुई है उसकी जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” हालांकि, लोगों का कहना है कि सिर्फ जांच और आश्वासन से परिवारों के आंसू नहीं थमने वाले।
अब बड़ा सवाल यह है कि बिजली विभाग कब जागेगा? कितने और घर उजड़ने के बाद इन जर्जर तारों को बदला जाएगा? बलिया के लोग अब कार्रवाई नहीं, ठोस नतीजे चाहते हैं।

