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महेंद्रगढ़। समाज में दहेज प्रथा के नाम पर होने वाले आर्थिक बोझ, दिखावे और अनावश्यक खर्चों के बीच हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है, जिसने लोगों के दिल जीत लिए हैं।
मॉडर्न सीनियर सेकेंडरी स्कूल के डायरेक्टर हुकम सिंह तंवर ने अपने पोते डॉ. कपिल तंवर की शादी मात्र एक रुपये और एक नारियल लेकर की। यह घटना न सिर्फ चर्चा का विषय बन गई है, बल्कि समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी देती है।
एक रुपये और एक नारियल में हुई डॉक्टर कपिल और डॉक्टर शिवानी की शादी
डॉ. कपिल तंवर के पिता प्रदीप तंवर ने बताया कि उनके बेटे की शादी 23 नवंबर को दिल्ली के पीरागढ़ी नांगलोई निवासी डॉ. शिवानी शेखावत से संपन्न हुई। सबसे खास बात यह है कि इस शादी में न कोई दहेज लिया गया और न ही कोई अनावश्यक खर्चा किया गया।
परिवार के अनुसार, कपिल के बड़े भाई डॉ. प्रशांत तंवर की शादी भी बिना दहेज और दिखावे के की गई थी। तंवर परिवार हमेशा से सादगीपूर्ण और सामाजिक सोच के साथ शादियां करता आया है।
दूल्हे के दादा बोले — ‘लड़की के पिता पर अनावश्यक बोझ डालना गलत’
परिवार के मुखिया हुकम सिंह तंवर ने कहा —
“दहेज प्रथा समाज पर एक बड़ा अभिशाप है। हमारी कोशिश है कि लड़की के पिता पर अनावश्यक खर्च का बोझ न पड़े। जब लोग दहेज लेना बंद करेंगे, तब गरीब से गरीब पिता भी अपनी बेटी की शादी सम्मान के साथ कर सकेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि समाज में बेटियों की शादी को बोझ मानने की सोच इसी दहेज प्रथा की वजह से पैदा होती है। इसलिए ऐसे प्रयास बदलाव की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण हैं।
दूल्हा-दुल्हन दोनों डॉक्टर, समाज को दिया बड़ा संदेश
इस शादी को खास बनाने वाली एक और बात यह है कि दूल्हा और दुल्हन दोनों ही प्रोफेशनल डॉक्टर हैं। डॉक्टर कपिल ने बताया कि उन्होंने दहेज को समाज के लिए “नुकसानदायक प्रथा” मानते हुए इसे सख्ती से ठुकराने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा—
“हमारा मानना है कि शादी दो परिवारों का मिलन है, कोई व्यापार नहीं। दहेज लेना या देना दोनों ही गलत है।”
गांव और शहर में चर्चा — ‘ऐसी शादियां ही बदलेंगी समाज’
इस शादी में शामिल हुए लोगों ने तंवर परिवार की पहल को खूब सराहा। सभी का कहना था कि यह शादी आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण बनेगी।
कई लोगों ने कहा कि यदि शिक्षित परिवार इस तरह आगे आएंगे, तो समाज में दहेज जैसी कुरीतियां पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।
ग्रामीणों ने इस सादगीपूर्ण विवाह की प्रशंसा करते हुए कहा—
“यह शादी दिखावे और दहेज के खिलाफ समाज के लिए एक खुला संदेश है कि बिना खर्च, बिना लोभ और बिना दहेज भी रिश्ते खूबसूरत बन सकते हैं।”
दहेज प्रथा पर करारी चोट, परिवारों के लिए प्रेरक उदाहरण
आज भी देश के कई हिस्सों में दहेज के कारण बेटियों को बोझ समझा जाता है, लाखों लड़कियों की शादी देर से होती है और कई बार मानसिक व आर्थिक शोषण तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में महेंद्रगढ़ के तंवर परिवार का यह कदम समाज की सोच को बदलने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
इस शादी ने साबित किया कि —
दहेज नहीं, संस्कार जरूरी हैं। दिखावा नहीं, मान-सम्मान जरूरी है।
शादी में शामिल लोगों ने दिया आशीर्वाद
शादी समारोह में शामिल हजारों लोगों ने नवदंपति कपिल तंवर और शिवानी शेखावत को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह शादी समाज में एक नई शुरुआत है।
कई सामाजिक संगठनों ने भी तंवर परिवार के इस निर्णय को सराहनीय बताया और कहा कि आने वाले समय में ऐसे कदम उठाने वाले परिवारों की संख्या जरूर बढ़ेगी।
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