टप्पेबाजों की मौज, पुलिस की खामोशी—ददरी मेला में फिर उजागर हुआ सिस्टम फेल्योर

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बलिया के ऐतिहासिक ददरी मेला में रविवार की शाम अव्यवस्थाओं और मेला प्रबंधन की लापरवाही ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। जलपरी शो के टिकट काउंटर पर हुए हंगामे, झूला संचालकों की बदसलूकी, मारपीट और अफरातफरी के बीच विजयीपुर, बलिया के रहने वाले अधिवक्ता प्रवीण कुमार सिन्हा (अधेड़) की मौत हो गई।

परिजनों और मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, टिकट काउंटर पर मौजूद संदिग्ध टप्पेबाज बड़े नोट बदलने के नाम पर लोगों से पैसों का लेनदेन करते थे। कथित तौर पर पैसे कम दिए जाने की आशंका से विवाद बढ़ा और झूला कर्मचारियों के साथ कहासुनी से माहौल पूरी तरह तनावग्रस्त हो गया।

इसी बीच अव्यवस्था, धक्का-मुक्की और मारपीट की घटनाओं को देख अधेड़ की तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उन्हें अचानक माइनर अटैक जैसा दौरा पड़ा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने CPR दिया और जिला अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

प्रशासन और पुलिस की खामोशी पर सवाल

ददरी मेला प्रतिदिन हजारों लोगों की भीड़ समेटता है, लेकिन—

एम्बुलेंस जैसी बुनियादी व्यवस्था नहीं

झूला कर्मचारियों और टिकट काउंटर कर्मियों की लगातार बदसलूकी की शिकायतें

संदिग्ध टप्पेबाजों की मौजूदगी पर कार्रवाई नहीं

भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और मॉनिटरिंग में पुलिस की भारी लापरवाही

सबसे बड़ा सवाल यह है कि शाम 6:00–6:30 बजे की CCTV फुटेज अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? आखिर किस वजह से प्रशासन और मेला प्रबंधन इस घटना पर चुप्पी साधे है?

ददरी जैसा ऐतिहासिक और भीड़भाड़ वाला मेला जहां दूर-दराज से परिवार आते हैं, वहां सुरक्षा का यह स्तर मेला प्रभारी, पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन की जवाबदेही को कटघरे में खड़ा करता है।

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